जालंधर के युवक का शव रूस से घर पहुंचा:माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल, DNA से हो पाई पहचान, आज होगा अंतिम संस्कार

जालंधर के युवक की डेडबॉडी देर रात रूस से घर लाई गई। युवक मनदीप की रूस-यूक्रेन जंग में मौत हो गई थी। परिवार ने अपने तौर पर रूस जाकर शव को ढूंढा। इस प्रक्रिया में 1 साल से ज्यादा का समय निकल गया। गोराया के मोहल्ला गुरु रविदास नगर से मनदीप 3 साल पहले रूस गया था। वहां एड देख नौकरी के झांसे में एजेंटों ने फंसा लिया और वहां की आर्मी में जबरन भर्ती कर लिया। मंदीप हैंडिकेप्ट था, टांग में प्राब्लम थी। बावजूद इसके भर्ती कर लिया। 1 मार्च 2024 से परिवार का उसके साथ संपर्क टूट गया था। छोटे भाई जगदीप ने रूस जाकर उसे ढूंढा। दिल्ली में DNA भी करवाया है। इससे पहले पिता भी रूस जाकर ढूंढ़कर आए थे, लेकिन नहीं मिल पाया था। मनदीप का आज गांव के श्मशानघाट में अंतिम संस्कार किया जाएगा। शव आते ही मची चीख पुकार जैसे ही दिल्ली से मनदीप का शव गोराया पहुंचा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। हर किसी का रो-रोकर बुरा हाल था। मां के आंसू नहीं थम पा रहे थे। जैसे ही बेटे की डेडबॉडी वाला ताबूत घर के आंगन में पहुंचा तो पिता फफककर रो पड़े। लोगों ने उनको दिलासा दिलाया और पानी पिलाकर ढांढ़स बंधाया। 30 साल का था मनदीप, रोजगार के लिए गया था गोराया कस्बे का रहने वाला 30 वर्षीय मनदीप कुमार पिछले 3 साल से रूस में रह रहा था, जहां वह बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में गया था। परिजनों ने बताया की मनदीप ट्रैवल एजेंटों के झांसे में आ गया था। उसे नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन देकर रूस भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचते ही परिस्थितियां बदल गईं। जगदीप बोला- 2 बार रूस जाकर ढूंंढी भाई की डेडबॉडी जगदीप ने बताया कि भाई मनदीप पिछले 2 साल से लापता था। मैंने भारत में एंबेसी सहित कई अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन किसी ने साथ नहीं दिया। राज्य सरकार ने भी कोई मदद नहीं की। इसके बाद मैं 3 मार्च 2024 को पहली बार रूस गया। वहां लैग्वेज प्राब्लम के चलते मैं ढूंढने में कामयाब नहीं हो पाया। वहां पर मुझे पता चला कि 5-6 के ग्रुप में लड़कों को लड़ने के लिए भेजा गया था। मैं एक बार फिर अक्तूबर 2024 में रूस गया। इस बार वह मनदीप के कमांडर को ढूंढने में सफल हो पाया। मैंने उसे अपने भाई के बारे में बताया। इस पर उसने हेल्प करने के लिए एक वकील दिया। मेरा वहां पर DNA करवाया गया और इंडियन की बॉडी के साथ मैच किया गया, इससे भाई की पहचान हो पाई। ये जानकारी मैंने भारतीय एंबेसी को दी। इसके बाद एंबेसी ने मदद की और बॉडी वापस आ पाई। आर्मेनिया में तीन महीने की मजदूरी बता दें कि, मनदीप कुमार 17 सितंबर 2023 को एक रिश्तेदार और तीन परिचितों के साथ आर्मेनिया के लिए रवाना हुआ था। मनदीप और उसके साथी अमृतसर से फ्लाइट के जरिए आर्मेनिया पहुंचे। उन्होंने तीन महीनों के लिए आर्मेनिया में मजदूरों के रूप में काम किया। 9 दिसंबर 2023 को वे रूस पहुंचे। हालांकि मनदीप कुमार रूस में ही रहा, जबकि उसका रिश्तेदार और तीन अन्य साथी भारत वापस आ गए। मृतक मनदीप के भाई जगदीप कुमार ने कहा कि वे अब यह जानकारी हासिल करेंगे कि उसके भाई को रूसी सेना में कैसे भर्ती किया गया था, क्योंकि उसका भाई दिव्यांग था और दिव्यांग व्यक्ति सेना में भर्ती होने के योग्य नहीं होते। वे अब इस मामले में विदेश मंत्रालय और रूसी सरकार से बात करेंगे और रूसी अदालत में मुकदमा भी दायर करेंगे।