मजदूर विरोधी कानून रद्द करवाने, बुढ़ापा पेंशन 5 हजार रुपए करने की मांग पर धरना

भास्कर न्यूज | जालंधर ग्रामीण और खेत मजदूर संगठनों के संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर विभिन्न मजदूर संगठनों ने बुधवार को डीसी कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र की मोदी सरकार और पंजाब की भगवंत मान सरकार को मजदूर विरोधी बताते हुए सभी मजदूर विरोधी कानून रद्द करने और मजदूरों की जायज मांगें स्वीकार करने की मांग की गई। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ग्रामीण मजदूर यूनियन पंजाब के राज्य अध्यक्ष तरसेम पीटर, ग्रामीण मजदूर सभा के राज्य अध्यक्ष दर्शन नाहर, पंजाब खेत मजदूर यूनियन के राज्य वित्त सचिव हरमेश मालरी, पंजाब खेत मजदूर सभा के वीर कुमार और कुल हिंद खेत मजदूर यूनियन के सोढ़ी राम उप्पल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा के तहत मिलने वाले सीमित रोजगार को भी खत्म कर रही है और चार लेबर कोड लागू कर मजदूरों पर और बोझ डाल रही है। नेताओं ने कहा कि बिजली संशोधन बिल के जरिए गरीबों के घरों में अंधेरा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पंजाब सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। मजदूर संगठनों ने मांग की कि मनरेगा एक्ट को बहाल कर पूरे वर्ष रोजगार की गारंटी दी जाए और दिहाड़ी कम से कम 700 रुपए की जाए। साथ ही लेबर कानून बहाल करने, बिजली संशोधन बिल रद्द करने, मजदूरों के कर्ज माफ करने, बाढ़-बारिश से हुए नुकसान का मुआवजा देने, आवासीय प्लॉट, विधवा-बुढ़ापा पेंशन 5000 रुपए, महिलाओं के खातों में 1100 रुपए जमा करने और जमीन सुधार कानून लागू करने की मांग उठाई गई। एक प्रस्ताव के जरिए मजदूर नेता मुकेश मलौद की रिहाई और पत्रकारों पर दर्ज केस वापस लेने की भी मांग की गई। इस मौके पर कश्मीर सिंह घुगशोर, बलदेव नूरपुरी, हरपाल बिट्टू, सुखजिंदर लाली, परमजीत रंधावा, कश्मीर मंडियाला, गुरचरण सिंह अटवाल और शीतल सिंह ने भी संबोधित किया।