प्राइम लोकेशन वाला सिल्वर ओक स्कूल होगा बंद, वजह- 34 बच्चों पर चार टीचर, सीबीएसई बोर्ड होने से मिड डे मील बंद होना भी वजह
- Admin Admin
- Jan 07, 2026
कपिल कुमार | जालंधर रामामंडी स्थित सिल्वर ओक स्कूल अब बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। स्कूल में इस समय महज 34 बच्चे पढ़ रहे हैं, जिन्हें 4 शिक्षक पढ़ा रहे हैं। बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने सर्वे कराया, इलाके में जागरूकता अभियान भी चलाया, लेकिन इसके बावजूद नामांकन में कोई बढ़ोतरी नहीं हो सकी। लगातार गिरती छात्र संख्या और बढ़ते वित्तीय घाटे को देखते हुए कैंटोनमेंट बोर्ड ने स्कूल को बंद करने का फैसला ले लिया है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी अप्रैल सत्र से स्कूल में कोई नया दाखिला नहीं लिया जाएगा। वर्ष 2024 के सत्र में स्कूल में 54 विद्यार्थी थे, लेकिन हर साल यह संख्या गिरती चली गई। छात्र संख्या में लगातार आ रही गिरावट के कारण कैंटोनमेंट बोर्ड को स्कूल चलाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा नजर आने लगा था। खास बात यह है कि स्कूल की जमीन प्राइम लोकेशन पर स्थित है। बोर्ड पहले ही स्कूल के फ्रंट हिस्से की दुकानों और एक कोचिंग सेंटर को किराए पर दे चुका है, जिससे कैंटोनमेंट बोर्ड को हर महीने करीब सवा दो लाख रुपए की आमदनी हो रही है। इसके अलावा स्कूल नेशनल हाईवे के बेहद नजदीक है, जिससे बच्चों के साथ हादसों का खतरा भी बना रहता है। इन्हीं कारणों के चलते बोर्ड ने स्कूल को बंद करने का निर्णय लिया है। बोर्ड की योजना इस प्राइम लोकेशन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स विकसित करने की है, ताकि आय में और इजाफा किया जा सके। हाल ही में स्कूल प्रबंधन द्वारा बोर्ड को भेजी गई रिपोर्ट में साफ किया गया कि तमाम प्रयासों के बावजूद छात्र संख्या में सुधार नहीं हो रहा। रिपोर्ट में बताया गया कि स्थानीय क्षेत्र से केवल 10 बच्चे ही स्कूल आते हैं, जबकि शेष 24 छात्र उन इलाकों से आते हैं, जहां पहले से सरकारी स्कूल मौजूद हैं। इस स्थिति को देखते हुए कैंटोनमेंट बोर्ड ने मार्च 2026 तक स्कूल को पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया है। अप्रैल से सिल्वर ओक स्कूल में कोई प्रवेश नहीं होगा। मौजूदा छात्रों को कैंटोनमेंट बोर्ड के अन्य स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा और उन्हें घर से स्कूल तक परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। 1 बरसाती नाले पर ढक्कन नहीं। हादसों का डर। 2 फुटपाथ डैमेज। जनता ट्रैफिक के बीच से चल रही। 3 रोड लाइटें बंद हैं। सड़क जगह-जगह पर टूटी। सरकारी सुविधा मिलनी हुई बंद तो घट गए छात्र रामामंडी में 1995 इस स्कूल की शुरुआत हुई, जो 8वीं तक था। इस दौरान पूर्व राज्यसभा सांसद बलबीर िसंह ने स्कूल के लिए डोनेशन भी दी थी। हालांकि यह स्कूल पहले पीएपी में चलता था, लेकिन पीएपी में पुलिस डीएवी स्कूल और सरकारी स्कूल बना दिया था। इसके बाद इस स्कूल को रामामंडी में शिफ्ट कर दिया। रामामंडी में कैंटोनमेंट बोर्ड प्राइमरी स्कूल के नाम से चलता था, लेकिन बाद स्कूल का नाम प्राइवेट कर दिया गया और माध्यम सीबीएसई बोर्ड कर दिया गया। स्कूल में बच्चों की किताबें और वर्दी भी नहीं मिल रही थी। इस वजह से छात्रों का ग्राफ गिर गया। Ã सिल्वर ओक स्कूल में नए सत्र में बच्चों का प्रवेश नहीं होगा। इन बच्चों को कैंटोनमेंट बोर्ड के दूसरे स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा। साथ ही बच्चों के लिए ट्रांसपोर्ट की मुफ्त सुविधा मुहैया कराई जाएगी। वैसे बोर्ड भूरमंडी में नया स्कूल बनाने की भी प्लानिंग कर रहा है। -ओमपाल सिंह, सीईओ, कैंटोनमेंट बोर्ड, जालंधर Ã कैंटोनमेंट बोर्ड का नाम एक ब्रांड था, लेकिन नाम प्राइवेट और सीबीएसई बोर्ड होने से स्कूल में सरकारी सुविधा मिलना बंद हो गई। इस वजह से स्कूल में बच्चे भी कम हो गए। बोर्ड मीटिंग में भूरमंडी में नया स्कूल बनाने का मुद्दा उठाया गया था। -पुनीत भारती शुक्ला, सिविल मेंबर, कैंटोनमेंट बोर्ड



