भास्कर न्यूज | जालंधर हिंदू धर्म में पूर्णिमा का बहुत अधिक महत्व होता है। पूर्णिमा तिथि पर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। पौष महीने की पूर्णिमा तीन जनवरी दिन शनिवार को है। सूर्योदय से पहले ही पूर्णिमा तिथि शुरू होने से स्नान-दान, पूजा-पाठ और व्रत भी इसी दिन किया जाएगा। शास्त्रों में पौष पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्नान और दान के साथ ही सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है। शिव शक्ति मां बगलामुखी धाम के पंडित विजय शास्त्री ने बताया कि नववर्ष की पहली पूर्णिमा तीन जनवरी को है। इस महीने सूर्य देव की आराधना से मोक्ष मिलता है। पौष महीने की पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को खाने की चीजें और ऊनी कपड़ों का दान करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। धर्म ग्रंथों में इसे पौष पर्व कहा गया है। पौष पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और व्रत करने से पुण्य और मोक्ष मिलता है। सुबह सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना गया है। जबकि शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करके व्रत खोलना चाहिए। विद्वानों के अनुसार 2 जनवरी को 6 बजकर 54 शाम को पूर्णिमा तिथि होकर 3 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 33 पर समाप्त होगी। उदयकाल तीन जनवरी को होने की वजह से पूर्णिमा तीन जनवरी को मान्य होगी।



