जेलों में बंद मुलाजिमों की रिहाई की मांग को लेकर यूनियन ने किया रोष प्रदर्शन

भास्कर न्यूज | जालंधर पंजाब रोडवेज पनबस व पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन की ओर से पंजाब सरकार के खिलाफ गेट रैली कर जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान यूनियन के चेयरमैन बलविंदर राठ ने कहा कि कच्चे कर्मचारी लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार लगातार उनकी अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले महीनों कर्मचारियों को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए सरकार ने दर्जनों मुलाजिमों को गलत तरीके से जेलों में बंद कर दिया। बाद में सरकार और यूनियन के बीच हुई बैठकों में बंद कर्मचारियों को रिहा करने पर सहमति बनी थी, लेकिन आज तक कई कर्मचारियों को रिहा नहीं किया गया। आप ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों को रेगुलर करने और ट्रांसपोर्ट माफिया खत्म करने के वादे किए थे, लेकिन अब रोडवेज की हालत बद से बदतर हो गई है। ट्रांसपोर्ट विभाग का एक भी कच्चा कर्मचारी पक्का नहीं किया गया। सरकार के साथ 55 से 60 बैठकें हो चुकी हैं। नीति नहीं बनाई गई। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि मांगें हल करने की बजाय संघर्ष कर रहे कर्मचारियों पर गैर-कानूनी पर्चे दर्ज कर धारा 307 के तहत जेलों में डाला गया, ताकि उनकी आवाज दबाई जा सके। वर्तमान में भी कुछ कर्मचारी संगरूर जेल में बंद हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों पर बस बॉडी बनाने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन मौजूदा सरकार ने एक भी नई सरकारी बस नहीं डाली। विभाग का निजीकरण प्राइवेट बसों के जरिए किया जा रहा है, जिससे सरकारी बसों की संख्या लगातार घट रही है। हालात यह हैं कि विभाग के पास टायर, स्पेयर पार्ट्स, टिकट मशीन और कर्मचारियों की सैलरी तक के लिए पर्याप्त फंड नहीं है। सरकार पर पनबस और पीआरटीसी का करीब 1200 करोड़ रुपये का बकाया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को हर महीने सैलरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इस माह लोहड़ी का त्योहार होने के बावजूद वेतन को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। करीब 177 कर्मचारियों को बिना कारण 5 दिन जेल में रखा गया, जबकि 20 कर्मचारियों पर धारा 307 लगाई गई, जिनमें से 10 कर्मचारी अब भी संगरूर जेल में बंद हैं। इस मौके पर दलजीत सिंह जल्लेवाल ने कहा कि गेट रैली के बाद सभी कर्मचारी काली पट्टियां बांध पहनकर ड्यूटी करेंगे और आजाद देश में गुलाम कर्मचारियों जैसी स्थिति के खिलाफ सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कच्चे कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी गईं और संगरूर जेल में बंद साथियों को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो 9 जनवरी को संगरूर बस स्टैंड पर शांतिपूर्ण कन्वेंशन आयोजित कर अगले संघर्ष का ऐलान किया जाएगा।