जगराओं के युवक ने किया नशा माफिया का भंडाफोड़:नशेड़ी बनकर तस्करों के बीच रहा, डिजिटल सबूत जुटाए, फिर हुआ जानलेवा हमला
- Admin Admin
- Jan 09, 2026
लुधियाना जिले के जगराओं में एक युवक ने अपने छोटे भाई की नशे की ओवरडोज से हुई मौत के बाद कानून अपने हाथ में ले लिया। यह घटना सरकारी दावों पर सवाल उठाती है, क्योंकि युवक को शिकायतों पर कार्रवाई न होने के बाद खुद ही नशा नेटवर्क का पर्दाफाश करना पड़ा। सुधार थाना क्षेत्र के गांव अकालगढ़ निवासी अमरजीत सिंह उर्फ दीपू के छोटे भाई की 6 दिसंबर को नशे की ओवरडोज से मौत हो गई थी। इस घटना ने दीपू को नशा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया। दीपू ने खुद को नशे का आदी दिखाया और सीधे तस्करों से संपर्क साधा। उसने धीरे-धीरे उनका भरोसा जीता और पूरे एक महीने तक अंडरकवर रहकर नशा नेटवर्क की जानकारी जुटाई। इस दौरान उसने करीब डेढ़ लाख रुपए की हेरोइन खरीदी और ज्यादातर भुगतान ऑनलाइन किया, ताकि हर सौदे का डिजिटल सबूत मौजूद रहे। माफिया को यकीन दिलाने के लिए दीपू ने कई बार उनके सामने नशा करने का नाटक भी किया। लुधियाना के एसएसपी से की थी शिकायत सबूतों के साथ दीपू लुधियाना के एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता के पास पहुंचा। अपनी शिकायत में उसने भारतीय वायु सेना केंद्र हलवारा की अफसर कॉलोनी से जुड़े एक सिविलियन कर्मचारी और एक पुलिसकर्मी की भूमिका पर सीधे सवाल उठाए। दीपू ने आरोप लगाया कि कॉलोनी के आसपास से हेरोइन की खेप निकलती है और पुलिस की शह पर यह धंधा फल-फूल रहा है। हालांकि, शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और मामला फाइलों में दबा रहा। जब सिस्टम से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो दीपू ने फेसबुक लाइव के जरिए पूरे मामले को जनता के सामने उजागर कर दिया। लाइव के कुछ ही देर बाद, लुधियाना-बठिंडा हाईवे पर रत्तोवाल चौक के पास दीपू पर जानलेवा हमला किया गया। भीड़ जुटने पर हमलावर अपनी बाइक छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने बाइक जब्त कर ली है, लेकिन इस मामले में कार्रवाई की धीमी गति पर फिर सवाल उठ रहे हैं। ऊपर तक गुहार, तब जाकर हिली मशीनरी इसके बाद दीपू ने मामला सीधे मुख्यमंत्री भगवंत मान, डीजीपी गौरव यादव, रायकोट विधायक हाकम सिंह और डीआईजी लुधियाना रेंज तक पहुंचाया। डीआईजी सतिंदर सिंह के दखल के बाद कहीं जाकर पुलिस की नींद टूटी। एसएसपी के निर्देश पर सीआईए स्टाफ जगराओं ने पूछताछ शुरू की और नशा नेटवर्क की परतें खुलने लगीं। गिरफ्तारी हुई लेकिन क्या यही पूरा सच है पुलिस ने मुख्य आरोपी गुरपिंदर सिंह उर्फ हनी को फोन लोकेशन के आधार पर गांव छज्जावाल से दबोचा। इसके बाद परमिंदर सिंह उर्फ गोरा और कर्मजीत कौर (हलवारा निवासी) को भी गिरफ्तार किया गया। तीनों से महज 7 ग्राम चिट्ठा बरामद कर जेल भेज दिया गया। इतने में खेल खत्म नहीं होता दीपू का साफ कहना है कि गुरुवार को एसएसपी ने उसे बैंक रिकॉर्ड और अन्य सबूत सौंपने को कहा है, लेकिन मौजूदा कार्रवाई से वह बिल्कुल संतुष्ट नहीं है। उसका दावा है कि अगर ईमानदार और गहरी जांच हुई, तो कई बड़े नाम, कई वर्दियां और कई रसूखदार चेहरे सामने आ सकते हैं। सूत्रों की मानें तो अगर जांच को हल्का किया गया, तो यह लड़ाई थाने की चारदीवारी से निकलकर सड़कों तक पहुंच सकती है।



