पंजाब में मनरेगा रोजगार वितरण प्रणाली में बदलाव:केंद्र द्वारा जारी नोटिफिकेशन के आधार पर मिलेगा, प्रशासनिक अधिकारों में कटौती
- Admin Admin
- Jan 05, 2026
मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत रोजगार वितरण प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब रोजगार स्थानीय मांग के बजाय केंद्र द्वारा जारी नोटिफिकेशन के आधार पर मिलेगा। यह बदलाव पंजाब, झारखंड या तमिलनाडु जैसे राज्यों में रोजगार आबंटन को प्रभावित करेगा। सभी निर्णय दिल्ली से नियंत्रित होंगे पंजाब कांग्रेस यूथ प्रधान मोहित महेंद्र ने कहा कि नए कानून से जमीनी स्तर के प्रशासन के अधिकारों में कटौती होगी। पहले, मनरेगा ने ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को स्थानीय स्तर पर आवश्यक कार्यों का निर्धारण करने का अधिकार दिया था। अब राष्ट्रीय परिषद के माध्यम से सभी निर्णय दिल्ली से नियंत्रित होंगे। सवाल यह उठता है कि दिल्ली में बैठे अधिकारी कैसे तय कर पाएंगे कि किसी विशेष क्षेत्र में सड़क मरम्मत या पेयजल पाइपलाइन अपग्रेडेशन की आवश्यकता है। राज्य पहले ही बोझ के तले दबा स्थानीय पंचायतों से सलाह लेना आवश्यक होगा। नए कानून से पंजाब को विशेष रूप से बड़ा झटका लगने की आशंका है। राज्य पहले से ही लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के भारी कर्ज के बोझ तले दबा है। ऐसे में जब काम का प्रत्येक अतिरिक्त दिन राज्य के बजट पर वित्तीय बोझ डालेगा, तो सरकार रोजगार बढ़ाने के बजाय उसे कम करने का विकल्प चुन सकती है। यह बिल गरीबों के लिए काम के अवसरों में कमी और पंजाब के लिए बिजली की उपलब्धता में संभावित कमी की गारंटी देता है। कांग्रेस इस कानून का विरोध करती है कांग्रेस पार्टी का मानना है कि रोजगार एक अधिकार है, न कि कोई उपहार है। पार्टी का मत है कि राज्यों को शासन में भागीदार होना चाहिए, न कि दिल्ली के लिए केवल बिलिंग काउंटर। कांग्रेस इस कानून का कड़ा विरोध करती है, क्योंकि यह संघवाद को कमजोर करता है, गांवों में रोजगार के अवसर कम करता है, गरीबों के साथ अन्याय करता है और विशेष रूप से पंजाब के लिए अत्यधिक हानिकारक है।



