स्पॉन्सरशिप स्कीम बच्चों की भलाई के लिए वरदान हैं : डीसी

बरनाला| स्पॉन्सरशिप (फॉस्टर केयर) स्कीम भारत सरकार और पंजाब सरकार की तरफ से चलाई जाने वाली एक जरूरी भलाई की स्कीम है, जिसके तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों को हर महीने 4000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है। डिप्टी कमिश्नर बरनाला टी बेनिथ ने बताया कि इस स्कीम का मुख्य मकसद उन बच्चों की देखभाल करना है जो अनाथ हैं, अपने माता-पिता से अलग हो गए हैं या किसी वजह से अपने बायोलॉजिकल परिवार के साथ नहीं रह सकते। उन्होंने बताया कि फॉस्टर केयर सिस्टम के तहत ऐसे बच्चों को कुछ समय या लंबे समय के लिए प्यार भरा पारिवारिक माहौल दिया जाता है। इस सिस्टम में बच्चे को एक सही और तैयार परिवार को सौंप दिया जाता है, जो उसकी पढ़ाई, सेहत, खान-पान और सामूहिक विकास की पूरी ज़िम्मेदारी लेता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रदीप गिल ने बताया कि स्पॉन्सरशिप व पालक देखभाल योजना के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों को 4000 रुपए प्रतिमाह आर्थिक मदद दी जाती है। लाभार्थी बच्चा 18 साल की उम्र तक इस योजना का लाभ ले सकता है। ग्रामीण इलाकों में 72 हजार रुपए और शहरी इलाकों में 96 हजार रुपए से कम कमाने वाले इस स्कीम के लिए एलिजिबल हैं। इस स्कीम का मुख्य मकसद बच्चों को इंस्टीट्यूशनल केयर (जैसे चाइल्ड होम वगैरह) के बजाय फैमिली वाला माहौल देना है, क्योंकि बच्चे परिवार में रहकर मेंटली और सोशली बेहतर डेवलप होते हैं। स्पॉन्सरशिप स्कीम समाज को यह मैसेज देती है कि हर बच्चा प्यार, सिक्योरिटी और एक अच्छे भविष्य का पूरा हकदार है और यह स्कीम समाज में इंसानी वैल्यूज को और मजबूत करती है। इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए कोई भी व्यक्ति जिला चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट या चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के ऑफिस में अप्लाई कर सकता है। संगरूर| केंद्र और पंजाब सरकार द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जा रही स्पॉन्सरशिप (फोस्टर केयर) योजना बच्चों के कल्याण की दिशा में एक अहम पहल है। जिला कार्यक्रम अधिकारी संगरूर रतिंदर पाल कौर धालीवाल ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों की देखभाल करना है जो अनाथ हैं, माता-पिता से बिछड़ चुके हैं या किसी कारणवश अपने जैविक परिवार के साथ नहीं रह पा रहे। फोस्टर केयर प्रणाली के अंतर्गत ऐसे बच्चों को अस्थायी या दीर्घकालिक रूप से एक स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध करवाया जाता है। इस व्यवस्था में बच्चे को किसी योग्य और इच्छुक परिवार को सौंपा जाता है, जो उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी निभाता है। हालांकि फोस्टर परिवार बच्चे के कानूनी माता-पिता नहीं होते, लेकिन वे उसे परिवार के सदस्य की तरह प्यार, सुरक्षा और सहारा प्रदान करते हैं। सरकार द्वारा फोस्टर परिवार को निर्धारित वित्तीय सहायता भी दी जाती है।