मरुस्थलीय अध्ययन विकसित भारत 2047 के लिए जरूरी: प्रो. सिंह

जोधपुर, 04 जनवरी (हि.स.)। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा इश्यूज़ एंड चैलेंजेज़ ऑफ़ सस्टेनेबिलिटी एंड रूरल लाइवलीहुड इन डेजर्ट लैंडस्केप: विजऩ फॉर विकसित भारत–2047 विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शोधपरक निष्कर्षों के साथ हुआ।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा), राजस्थान के महामंत्री प्रो. रिछपाल सिंह ने अपने समापन उद्बोधन में कहा कि मरुस्थलीय परिदृश्य में सतत विकास और ग्रामीण आजीविका का प्रश्न केवल भौगोलिक विमर्श नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब शिक्षा, शोध और नीति-निर्माण के बीच प्रभावी संवाद स्थापित किया जाएगा। समापन सत्र के विशिष्ट अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के हिमालयन अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. बी.डब्ल्यू पांडे ने कहा कि मरुस्थलीय और शीत मरुस्थलीय क्षेत्रों के अध्ययन से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय उदयपुर के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. सीमा जालान ने क्षेत्रीय भौगोलिक समस्याओं के समाधान हेतु राष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक समन्वय और संयुक्त शोध की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कला, शिक्षा एवं समाज विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. औतार लाल मीना ने की।

संगोष्ठी के दूसरे दिन चार सत्र आयोजित हुए जिनमें दो तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से जुड़े विद्वानों द्वारा ऑनलाइन शोध पत्रों का वाचन किया गया। अंत में आयोजन सचिव डॉ. ललित सिंह झाला ने आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ गोविंद सिंह ने एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अर्जुन लाल मीना ने स्वागत उद्बोधन दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश