चंडीगढ़ कोर्ट ने दिए 19.61 लाख मुआवज़ा देने के आदेश:जीरकपुर सड़क हादसे मौत, तेज रफ्तार वाहन ने मारी टक्कर​​​​​​​,कोर्ट में चालक की लापरवाही साबित

जीरकपुर में सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार वाहन ने युवक को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में चंडीगढ़ मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने हादसे के लिए वाहन चालक को जिम्मेदार ठहराते हुए मृतक की बहन को 19 लाख 61 हजार 200 रुपए मुआवज़ा देने के आदेश दिए हैं। इस राशि पर क्लेम याचिका दायर करने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा। ट्रिब्यूनल ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों के आधार पर मृतक की मासिक आय करीब 13,900 रुपए मानी। भविष्य की आय में बढ़ोतरी जोड़ते हुए और व्यक्तिगत खर्च घटाकर कुल मुआवज़ा तय किया गया। इस मुआवजे में परिवार की कमाई का नुकसान, अंतिम संस्कार का खर्च, संपत्ति का नुकसान और कंसोर्शियम की राशि शामिल की गई है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि हादसे के समय वाहन बीमित था और चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी मौजूद था। ऐसे में बीमा कंपनी को ही मुआवजे की राशि पहले अदा करनी होगी। सड़क पार करते समय हुआ हादसा हादसा 17 सितंबर 2022 की शाम करीब साढ़े सात बजे हुआ। मृतक जीरकपुर में एक सड़क को पार कर रहा था। जब वह लगभग पूरी सड़क पार कर चुका था, तभी जीरकपुर की ओर से तेज रफ्तार में आ रहे महिंद्रा ट्रक (छोटा हाथी) ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत सेक्टर-32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 20 सितंबर 2022 को उसकी मौत हो गई। कोर्ट में चालक की लापरवाही साबित मामले में मौके पर मौजूद की गवाही और एफआईआर को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने माना कि हादसा वाहन चालक की तेज रफ्तार और लापरवाही से हुआ।ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि चालक खुद गवाही देने के लिए सामने नहीं आया, जिससे उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाया गया। बीमा कंपनी की आपत्तियां खारिज बीमा कंपनी ने दावा किया था कि मृतक की बहन मुआवजे की हकदार नहीं है क्योंकि वह विवाहित है और आश्रित नहीं थी। हालांकि ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मृतक का कोई भी वैध कानूनी प्रतिनिधि मुआवज़ा मांग सकता है। ट्रिब्यूनल ने माना कि मृतक के माता-पिता के निधन के बाद उसकी बहन ही एकमात्र जीवित कानूनी वारिस है और वह मुआवजे की पात्र है।