चंडीगढ़ फरवरी में नई आबकारी नीति होगी जारी:तस्करी रोकने पर फोकस, 2026-27 नीति 60 सुझाव मिले, 1 अप्रैल से लागू, 100 ठेकों की संभावना

चंडीगढ़ प्रशासन ने वित्तीय सत्र 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नीति को अंतिम रूप देने से पहले सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। प्रशासन ने 30 दिसंबर तक सुझाव आमंत्रित किए थे, जिनके तहत अलग-अलग वर्गों से कुल 60 सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सुझावों का अध्ययन किया जा रहा है और उपयुक्त सुझावों को नीति में शामिल किया जा सकता है। इस संबंध में डीसी एवं आबकारी विभाग के आयुक्त निशांत यादव की अध्यक्षता में अलग बैठक होने जा रही है। विभाग के अनुसार फरवरी में नीति अधिसूचित कर दी जाएगी, जबकि यह 1 अप्रैल से लागू होगी। नई आबकारी नीति तैयार करते समय प्रशासन ने अन्य राज्यों की नीतियों का भी अध्ययन किया है, ताकि चंडीगढ़ की नीति में मौजूद खामियों को दूर किया जा सके। नीति में शराब के ठेकों के खुलने और बंद होने के समय में भी बदलाव संभव है। ठेकेदार पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर वैट और एक्साइज ड्यूटी कम करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि वहां चंडीगढ़ की तुलना में शुल्क कम है। ठेकों की संख्या 100 रहने की संभावना वर्तमान नीति में 98 शराब ठेकों के लाइसेंस तय थे। नई नीति में भी करीब 100 ठेकों की साइट तय किए जाने की संभावना है। हर साल शराब ठेकों की नीलामी को लेकर विक्रेताओं में प्रतिस्पर्धा रहती है। पिछली बार ठेकेदारों की एसोसिएशन ने नीति पर नाराजगी जताई थी और नीलामी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती भी दी थी। बीते पांच वर्षों में प्रशासन कभी भी राजस्व लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है। अहातों में सीसीटीवी और एल्कोमीटर का सुझाव प्राप्त सुझावों में यह भी शामिल है कि शराब के ठेकों और अहातों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। इसके साथ ही अहातों में एल्कोमीटर लगाने का प्रस्ताव है, ताकि नशे में वाहन चलाने जैसी घटनाओं पर रोक लगे। नाबालिगों द्वारा शराब खरीद की सख्त जांच का सुझाव दिया गया है। यदि कोई विक्रेता नाबालिग को शराब बेचता पाया गया, तो उस पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाए। साथ ही शिक्षण संस्थानों से शराब ठेकों की दूरी 200 मीटर तय करने की बात भी कही गई है। होटल और क्लब इंडस्ट्री की मांग होटल और क्लब इंडस्ट्री की ओर से सुझाव दिया गया है कि उन्हें पहले की तरह शराब सीधे कंपनियों से खरीदने की अनुमति दी जाए। पिछली नीति में होटल और क्लबों को भी रिटेल ठेकों से ही शराब खरीदना अनिवार्य कर दिया गया था, जिससे उद्योग को दिक्कतें आई थीं। घाटा रोकना और तस्करी पर सख्ती प्राथमिकता प्रशासन का लक्ष्य पिछली नीति की तरह घाटा न हो। पिछले साल की आबकारी नीति से प्रशासन को करीब 200 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। नई नीति में शराब तस्करी रोकने के लिए सख्त प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। बिना परमिट बिकने वाली शराब मिलने पर ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पिछले वर्ष आबकारी एवं कराधान विभाग ने 66 स्थानों पर छापेमारी कर शहर से करीब 19 हजार शराब की बोतलें जब्त की थीं। विभाग का कहना है कि शहर में ऐसी शराब भी बिक रही है, जिसकी लाइसेंस फीस प्रशासन को नहीं मिल रही।