निजी विवाद में सजा पर ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती: हाईकोर्ट

चंडीगढ़ | हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विभागीय और न्यायिक कार्यवाही पूरी होने के बाद ग्रेच्युटी रोकी नहीं जा सकती, खासकर तब जब आपराधिक सजा का कर्मचारी के आधिकारिक कर्तव्यों से कोई संबंध न हो। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल समाप्त होने के बाद ग्रेच्युटी को रोके रखने की अनुमति देने वाला कोई नियम मौजूद नहीं है। जस्टिस जगमोहन बंसल ने एक कर्मचारी की याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को सेवानिवृत्ति लाभ जारी करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता को एक निजी विवाद से जुड़े आपराधिक मामले में एक वर्ष की सजा हुई थी, जिसका उसके सरकारी कार्य से कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने उसकी ग्रेच्युटी रोक रखी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति को पांच वर्ष बीत चुके हैं और उसके खिलाफ न तो कोई अन्य कार्यवाही लंबित है और न ही सेवा से बर्खास्तगी की संभावना है।