निलंबित डीआईजी भुल्लर को झटका... सीबीआई कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका, सवा 2 घंटे तक चली बहस

रोपड़ रेंज के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर के क्रप्शन मामले में दायर जमानत याचिका पर शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट में सुनवाई हुई। करीब सवा 2 से ढाई घंटे तक कोर्ट में आरोपी पक्ष और सीबीआई प्रॉसीक्यूशन की ओर से एक-दूसरे की दलीलों का उदाहरण समेत सवाल-जवाब हुए। हालांकि दलीलें सुनने के बाद देर शाम करीब साढ़े 5 बजे कोर्ट ने भुल्लर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इससे पहले आय से अधिक संपति मामले में भी सीबीआई कोर्ट से आरोपी भुल्लर की याचिका पहले खारिज हो चुकी है। सुबह करीब सवा 10 बजे कोर्ट में मामले को लेकर सुनवाई शुरू हुई, जिसमें आरोपी पक्ष ने दलीलें दीं कि जांच सत्यापन सीबीआई के एसआई सचिन सिंह ने किया, लेकिन उन्होंने उसी तारीख को केस दर्ज करने की अनुशंसा नहीं की। यानी उस तारीख को कोई क्राइम नहीं हुआ था। शिकायतकर्ता को 15 अक्टूबर को सीबीआई कार्यालय बुलाया गया और उसे वॉयस रिकॉर्डर देकर रिकॉर्डिंग के लिए निर्देश दिए गए। मगर उसने वॉयस रिकॉर्डर एसआई सचिन सिंह को यह कहते लौटा दिया कि तकनीकी खराबी के कारण रिकॉर्डिंग नहीं हो सकी। इससे साबित होता है कि रिश्वत राशि की कोई मांग साबित नहीं हुई। ट्रैप को लेकर सीबीआई द्वारा दाखिल चालान-शिकायत अनुसार रिश्वत की मांग साबित नहीं होती है, जो जल्दबाजी में बिना प्रक्रिया का पालन किए प्रस्तुत किया गया है। अभियोजन गवाहों के बयानों में प्रमुख विरोधाभास हैं। आय से अधिक संपत्ति के बाद अब भ्रष्टाचार मामले में डीआईजी की अर्जी नामंजूर अभियोजन गवाहों के बयानों में विरोधाभास, सीबीआई कोर्ट ने डीआईजी ​की दलीलें ठुकराईं एफआईआर में समय गलत है, जबकि गिरफ्तारी पहले की गई। दलीलें दीं गई कि शिकायतकर्ता पंजाब से है और रिश्वत फतेहगढ़ साहिब में लंबित एफआईआर के लिए ली जानी थी। सीबीआई ने अपनी ज्यूरिसडिक्शन दिखाने के लिए जानबूझ कर रिश्वत के लिए मीडिएटर को चंडीगढ़ बुलवाया। गिरफ्तारी मेमो के अनुसार उसी तारीख को याचिकाकर्ता को सीबीआई कार्यालय चंडीगढ़ सेक्टर-30 में शाम 8 बजे गिरफ्तार किया गया, पर वास्तविकता में मोहाली ऑफिस से 16 अक्टूबर सुबह 11:30 बजे हिरासत में लिया गया, जबकि सीबीआई पहले गिरफ्तारी चंडीगढ़ से दिखा रही थी। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने भुल्लर की याचिका को खारिज कर दिया है।