जन्मजात गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक बच्चे को मिला नया जीवन
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- Jan 05, 2026
--रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में हाइपोस्पेडियस का सफल ऑपरेशन
बांदा, 05 जनवरी (हि.स.)। कभी-कभी कुदरत कुछ कार्य अधूरे छोड़ देती है, जिन्हें इंसान अपने ज्ञान और मेहनत से पूरा करता है। शायद इसी वजह से डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक मामला उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा स्थित रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में देखने को मिला, जहां जन्मजात गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक बच्चे को नया जीवन मिला।
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में कार्यरत यूरो सर्जन डॉ. सोमेश त्रिपाठी ने जन्म से हाइपोस्पेडियस से पीड़ित आठ वर्षीय बालक का सफल ऑपरेशन कर जिले की चिकित्सा व्यवस्था को एक नई पहचान दिलाई है।
मूल रूप से तिंदवारी क्षेत्र के बेंदा गांव निवासी सूरज (8) पुत्र लक्ष्मीशरण को जन्म से ही पेशाब करने में अत्यधिक परेशानी थी। बच्चे की मूत्र नली आधी बनी हुई थी, जबकि बाकी हिस्सा पूरी तरह बंद था। इसी कारण मूत्र नली के बीच में छेद हो गया था और पेशाब सामान्य स्थान से न होकर नीचे की ओर होता था। इससे बच्चे को लगातार शारीरिक कष्ट झेलना पड़ रहा था।
सूरज के पिता ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे का इलाज कई नामी-गिरामी अस्पतालों में कराया, लेकिन कहीं भी संतोषजनक परिणाम नहीं मिला। अंततः वह सूरज को लेकर रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां जांच के बाद डॉ. सोमेश त्रिपाठी ने सर्जरी की सलाह दी। परिजनों की सहमति के बाद बीते सप्ताह बच्चे का ऑपरेशन किया गया।
डॉ. सोमेश त्रिपाठी ने सोमवार को बताया कि यह बीमारी हाइपोस्पेडियस कहलाती है, जिसमें मूत्र का छिद्र लिंग की निचली सतह पर होता है और लिंग में टेढ़ापन भी आ जाता है। समय पर इलाज न होने पर मूत्राशय और गुर्दे खराब होने का खतरा बना रहता है, साथ ही भविष्य में दाम्पत्य जीवन भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान बच्चे की अधूरी मूत्र नली को सर्जरी के माध्यम से लिंग की मांसपेशियों से तैयार कर पूर्ण रूप दिया गया। इसके बाद बच्चे को सामान्य तरीके से पेशाब होने लगा और लिंग की कार्यक्षमता भी पूरी तरह बहाल हो गई। यह ऑपरेशन लगभग ढाई से तीन घंटे तक चला।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि सरकारी अस्पताल में यह सर्जरी अत्यंत कम खर्च में की गई, जबकि यही ऑपरेशन किसी निजी अस्पताल में कराया जाता तो करीब डेढ़ से दो लाख रुपये तक का खर्च आता। सफल ऑपरेशन के बाद कुछ दिन तक बच्चे को भर्ती रखकर निगरानी में रखा गया। शनिवार को उसकी हालत पूरी तरह सामान्य होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस जटिल सर्जरी में डॉ. सोमेश त्रिपाठी के साथ डॉ. खुर्शीद अहमद (जेआर), डॉ. प्रिया दीक्षित, डॉ. पंकज तथा ओटी स्टाफ में आशीष हसन, उमा सहित अन्य कर्मचारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह



