अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे पर दूसरी याचिका स्वीकार, सुनवाई 21 फरवरी को

Second petition on claim of Shiva temple at Ajmer Dargah accepted, hearing on February 21Second petition on claim of Shiva temple at Ajmer Dargah accepted, hearing on February 21

सुनवाई 21 फरवरी को राज्‍य सरकार, आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट, दरगाह कमेटी को नोटिस जारी

अजमेर, 19 जनवरी(हि.स.)। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील ए पी सिंह के जरिए अजमेर सि‍विल कोर्ट में याचिका लगाई गई। जिसे सोमवार को मध्यान्ह बाद सुनवाई करते हुए स्वीकार कर लिया गया।

महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार एवं एडवोकेट ए पी सिंह ने मीडिया को बताया कि न्यायालय ने राजवर्धन सिंह परमार द्वारा 2022 में राष्ट्रपति को लगाई गई याचिका का जिक्र करते हुए परमार को प्रथम याचिका माना है। न्यायालय ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 फरवरी रखी है। वकील सिंह ने बताया कि महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से अजमेर के सिविल कोर्ट में याचिका पेश की गई। याचिका में अजमेर दरगाह के अंदर शिव मंदिर होने का दावा किया गया। साथ ही संबंधित राजस्व दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। उन्होंने दावा किया कि भारत में मुगल आक्रांताओं के आक्रमण से पूर्व का एक हिंदू मंदिर है, यहां महादेव का मंदिर है। प्राचीन काल में वहां पूजा होती थी। अयोध्या, काशी, संभल, सोमनाथ की तरह ही आक्रांताओं ने पृथ्वीराज चौहान की नगरी अजमेर में स्थित महादेव मंदिर को भी नष्ट कर यहां दरगाह बना दी। इसकी लड़ाई वे लम्बे समय से लड़ रहे हैंं। इसकी एक याचिका राष्ट्रपति को 2022 में प्रस्‍तुत की थी, जिस पर ढाई लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर थे, वह याचिका राष्ट्रपति के यहां से राजस्थान सरकार के मुख्‍य सचिव को भेज दी गई थी। मुख्य सचिव की ओर से जो पत्राचार किया गया है जिसके आधार अजमेर कोर्ट में याचिका पेश की गई, जिसे अब सुनवाई के लिए स्वीकार लिया है। उन्होंने कहा कि उनके पास प्राचीन तथ्य हैं।

याचिका में आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट राजस्थान सरकार और केंद्र का मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ पर्यटक मंत्रालय को भी पार्टी बनाया गया। एडवोकेट सिंह ने कहा कि यह बदलते दौर का भारत है अब इतिहास का भी संरक्षण होगा और सनातन धर्म का भी संरक्षण होगा। गौरतलब है कि पूर्व में इस मामले में हिन्दू सेना राष्ट्रीय के विष्णु गुप्ता की ओर से भी याचिका लगाई जा चुकी है। जिस पर सुनवाई भी हुई है। हिन्दू सेना ने अजमेर दरगाह में प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों की ओर से सालाना उर्स के दौरान चादर पेश नहीं किए जाने को लेकर भी एक साथ दो जगह सुप्रीम कोर्ट व अजमेर कोर्ट में वाद दायर किया था। किन्तु अर्जी पर किसी तरह के निर्णय से पहले ही ख्वाजा का 814वां उर्स सम्पन्न होने पर हिन्दू सेना की ओर से अर्जी पर दबाव नहीं दिया गया था। दरगाह में महादेव मंदिर होने के संबंध में याचिका के लगते ही दरगाह कमेटी, दरगाह अंजुमन की ओर से भी दरगाह को प्रार्थना स्थल माने जाने के विषय में सुनवाई की अर्जी दाखिल की जा चुकी हैं। मामला अजमेर की अदालत में विचाराधीन है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष