विहिप ने भी उठायी कुंभ क्षेत्र में गैर हिन्दुओं के प्रतिबंध की मांग

हरिद्वार, 08 जनवरी (हि.स.)। विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत अध्यक्ष रविदेव आनंद ने कहाकि देवभूमि उत्तराखण्ड में हरिद्वार एवं ऋषिकेश के पवित्र गंगा घाट केवल भौगोलिक स्थल नहीं अपितु भारतीय सनातन संस्कृति, आस्था और साधना की जीवंत धरोहर हैं। इन गंगा के पवित्र घाटों का इतिहास हजारों वर्षों से तप, त्याग, स्नान, दान और मोक्ष की अवधारणा से जुड़ा रहा है। विशेष रूप से कुंभ मेला क्षेत्र तो सम्पूर्ण विश्व में हिन्दू आस्था का सर्वोच्च प्रतीक है, जहां करोड़ों श्रद्धालु शास्त्रोक्त मर्यादाओं के साथ स्नान एवं धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

प्रेस को जारी बयान में रविदेव आनंद ने कहाकि हरिद्वार नगर पालिका की 110 वर्ष पुरानी नियमावली (1916 व 1953) में गंगा घाटों विशेषकर हर की पैड़ी एवं अन्य पवित्र स्थलों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का स्पष्ट उल्लेख है। यह नियम किसी प्रकार का नया निर्णय नहीं है, वरन हमारी ऐतिहासिक धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए पूर्व से लागू रहा है। कहा कि विश्व हिन्दू परिषद, उत्तराखण्ड का यह स्पष्ट मत है कि कुंभ मेला क्षेत्र के समस्त घाटों पर गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाना पूर्णतः जनभावनाओं के अनुरूप, शास्त्रसम्मत एवं ऐतिहासिक परंपराओं के अनुकूल है।

रविदेव आनंद ने कहा कि कुंभ मेला केवल एक आयोजन ही नहीं वरन हिन्दू समाज की सामूहिक चेतना और आस्था का महापर्व है, जहां पवित्रता, संयम और धार्मिक मर्यादा सर्वोपरि होती है। गत वर्षों में गंगा घाटों एवं आसपास के क्षेत्रों में मांस, मदिरा तथा अन्य अपवित्र गतिविधियों की घटनाओं ने हिन्दू समाज की भावनाओं को गहरा आघात पहुंचाया है। ऐसे में गंगा की निर्मलता, कुंभ की गरिमा और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए कठोर एवं स्पष्ट नियमों का समान रूप से पालन अनिवार्य है।

उन्होंने कुंभ मेला क्षेत्र एवं सभी पवित्र गंगा घाटों को धार्मिक मर्यादा क्षेत्र घोषित किए जाने, गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधी नियमों को कठोरता से लागू करने व मांस, मदिरा एवं अन्य अपवित्र गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने की मांग की।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला