जींद में हाइड्रोजन ट्रेन ट्रायल से पहले रेलवे ने तेज की तैयारियां, पीसीएमई ने किया निरीक्षण

-टीम ने कर्मचारियों से आरओ सिस्टम के वर्किंग के बारे में जानकारी ली

जींद, 16 जनवरी (हि.स.)। जींद के हाइड्रोजन प्लांट में खड़ी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल को लेकर रेलवे कोई कोर कसर नही छोड़ रहा है। रेलवे का प्रयास है कि ट्रायल से पहले हाइड्रोजन ट्रेन की सभी खामियों को दूर किया जाए। तसल्ली होने पर ही हाइड्रोजन ट्रेन को पटरी पर लाकर ट्रायल किया जाए।

शुक्रवार को दिल्ली से प्रिसिंपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर (पीसीएमई) डिंपी गर्ग सहित अन्य अधिकारी हाइड्रोजन प्लांट में पहुंचे। टीम ने आरओ प्लांट के साथ इलेक्ट्रोलाइजर के बारे में जानकारी ली। इलेक्ट्रोलाइजर में गैस बनती है, उसके लिए दो पंप लगाए गए हैं। अगर किसी कारण के पंप बंद हो जाए तो दूसरा पंप सुचारू रूप से चलता रहे और पानी की सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं आए। इसके अलावा गैस को इंजन के अंदर से निकाला जा रहा है। इसके बाद दोबारा से टेस्टिंग शुरू होगी।

निरीक्षण के दौरान सीपीएमई ने कहा कि आरओ के पानी को पौधों की सिंचाई में नहीं प्रयोग किया जाए। वहीं टीम ने कर्मचारियों से आरओ सिस्टम के वर्किंग के बारे में जानकारी ली।

यहां पीसीएमई ने कर्मचारियों को निर्देश दिए कि शुद्ध पानी के टैंक पर हरे रंग का पेंट किया जाए ताकि दोनों टैंक की अलग-अलग पहचान हो सके। इसके बाद कर्मचारियों से पानी के टीडीएस की डेली मानिटरिंग के लिए चार्ट बनाने के निर्देश दिए। क्योंकि 150 से 200 टीडीएस तक पानी मानव उपयोग के लिए उपयुक्त होता है। इससे कम या ज्यादा टीडीएस वाला पानी मानव के साथ-साथ पौधों के लिए भी नुकसानदायक होता है। कर्मचारियों ने कहा कि आरओ का टीडीएस 500 से ज्यादा है तो इस पर सीपीएमई ने कहा कि यह आरओ का पानी पौधों की सिंचाई के लिए प्रयोग नहीं किया जाए। उम्मीद है कि जनवरी माह के अंत तक ही हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल संभव हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा