आदर्श का एक पर्याय ‘दर्पण’, जिसमें हम स्वयं को देखते हैं : मिथिलेश नंदिनी शरण

वाराणसी, 08 जनवरी (हि.स.)। अयोध्या स्थित हनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि आदर्श यह नहीं बताता कि क्या होना चाहिए, बल्कि यह बताता है कि हम वास्तव में कैसे हैं। आदर्श का एक पर्याय ‘दर्पण’ है, जिसमें हम स्वयं को देखते हैं।

आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण गुरूवार को महामना महोत्सव पखवाड़ा के समापन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। सेवाज्ञ संस्थानम्, काशी के तत्वावधान में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन सभागार में आयोजित “स्वराज, स्वदेशी एवं स्वशिक्षा : मालवीय चिंतन में राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला” विषयक कार्यक्रम में आचार्य ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के व्यक्तित्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महामना के चरित्र को आत्मसात कर हमें अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधनहीनता और अनेक बाधाओं के बावजूद महामना ने महासेतु के निर्माण की तरह काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक होने का अर्थ परम्पराओं का विनाश नहीं, बल्कि उन्हें आत्मसात करते हुए आगे बढ़ना है। राष्ट्र निर्माण की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्र एक समेकित जीवन-बोध है, जिसमें साझा कल्याण की भावना निहित होती है। विश्वास की एकता और चरित्र-बल के समन्वय से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण सम्भव है। स्वराज, स्वदेशी और स्वशिक्षा महामना मालवीय के चिंतन के मूल आधार थे, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

संस्था के राष्ट्रीय सचिव माधव झा ने संगठन के उद्देश्यों, विचारधारा तथा संगठनात्मक संरचना को बताया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष प्रो. अवधेश प्रधान ने महामना मदन मोहन मालवीय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर संस्था द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। समापन समारोह में कार्यक्रम संयोजक डॉ. हरेंद्र कुमार राय, संस्था के अध्यक्ष आशीष, काशी महानगर इकाई के संयोजक शिवम पाण्डेय, शोला पटेल, सुयश दहौलिया आदि मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी