पंजाब में वीबी-रामजी के खिलाफ प्रस्ताव पर भड़के CM सैनी:बोले-ये भ्रम फैला रहे; इनकी पंचायतों में 10 हजार से अधिक घोटाले हुए

पंजाब में विकसित भारत जी राम जी के खिलाफ प्रस्ताव को लेक हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी भड़क गए। सीएम सैनी ने कहा कि मैं देश के ऐसे वर्ग के लिए आया हूं, जिसको लेकर विपक्ष झूठ फैला रहा है। क्योंकि कांग्रेस झूठ फैलाने में माहिर है। कांग्रेस को जब कुछ कहने को कुछ नहीं मिलता। विकसित भारत जी राम जी, इस योजना को लेकर इंडी गठबंधन भ्रम फैला रहा है। 30 दिसंबर में पंजाब विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें उन्होंने न तो कोई आंकड़ा दिया, न ही कोई तथ्य था। उन्होंने काह कि मैं आज एक बात कहना चाहूंगा कि अब ये झूठ नहीं चलेगा। झूठ लंबे समय तक नहीं चलेगा। शुद्ध राजनीतिक प्रस्ताव पंजाब विधानसभा में लाया गया। देश के करोड़ों ग्रामीणों श्रमिकों, मजदूरों से ये मुद्दा जुड़ा हुआ है। हम ये सब जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के श्रमिकों के लिए विकसित भारत जी राम जी योजना शुरू की है। इस योजना में पुरानी पड़ चुकी मनरेगा का स्थान लिया है। सीएम बोले- 5915 पंचायतों में 10 हजार गबन के मामले सीएम सैनी ने कहा कि देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब का दौरा किया कि तो वहां उन्हें मनरेगा के मजदूर मिले। उन्होंने शिकायत की कि उन्हें मनरेगा का लाभ नहीं मिल रहा है। इस योजना का सारा पैसा ठेकेदार हड़प रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने पाया कि कई मौकों पर सड़कों और नहरों की सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। पंजाब में 13 हजार 304 ग्राम पंचायतों में 5 हजार 915 ग्राम पंचायतों का सोशल ऑडिट हुआ है, उसके अनुसार 10 हजार से अधिक वित्तीय गबन के मामले सामने आए हैं। लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हरियाणा में श्रमिकों को 10 हजार रुपए अधिक मिलेंगे सीएम ने कहा कि हरियाणा में हर श्रमिक को इस योजना के तहत 10 हजार रुपए वार्षिक से अधिक मिलेंगे। इसकी वजह यह है कि पूरे देश में हरियाणा में मजदूरी की दर सबसे ज्यादा है। यहां 400 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से सरकार श्रमिकों को मजदूरी देती है। इस योजना के तहत हरियाणा में 65% से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है। इसके अलावा 50% से ज्यादा अनुसूचित जाति के वर्ग के श्रमिकों को रोजगार दिया गया है। इस कानून में कार्यों की प्रगति को भी बदला गया है। मैं तो मान साहब को आइना दिखाना चाहता हूं। बिना पढ़े ही इनकी सरकार विधानसभा में प्रस्ताव लेकर आ गए। ये गुमराह कर रहे हैं। 20 साल पहले शुरू हुई मनरेगा मनरेगा योजना लगभग 20 साल पहले शुरू किया गया था। मनरेगा और ऐसी ही कई योजनाओं की प्रकृति ऐसी थी कि इन्हें तैयार किया जाता है, पारित किया जाता है और लागू किया जाता है। इसमें सुधार भी किया जाता है। किसी योजना में रह गई अथवा समय की मांग को देखते हुए कमियों को दूर किया जाता है। ये नीति निर्माण का एक हिस्सा है। मनरेगा भी इस मामले में अलग नहीं है। मनरेगा में कई समस्याएं उन्होंने कहा कि मनरेगा में कई समस्याएं सामने आई हैं। मनरेगा के तहत श्रमिकों के बजाय मशीनों का यूज किया गया। बजट का अत्यधिक अनुमान, पहले से की गई योजनाओं को तोड़कर दोबारा करना। ऐसी ही कई कमियां इस योजना में देखने को मिली थीं। इन सब कमियों को श्रमिकों को लाभ नहीं मिल रहा था। अब समय बदल गया है। गांव में गरीबी भी कमी आई है। करीब 5 प्रतिशत की कमी आई है। अब देश में 25 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे हैं। पुराना ढांचा श्रमिकों के हित में नहीं ऐसे में एक पुराने खामियों से भरे ढांचे को बिना सुधार के ढोते रहना श्रमिकों के हित में नहीं था। न ही ये राष्ट्र हित में था। 2013 में कैग की रिपोर्ट आई, उस समय यूपीए की सरकार थी। इस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि यूपीएस के शासन के दौरान योजनाओं में फर्जी लाभार्थियों की भरमार थी। धन की हेराफेरी के उद्देश्य से लाभार्थियों की सूची में हेराफेरी की गई। इसकी वजह यह थी कि इस योजना में कोई बायोमैट्रिक जांच नहीं होती थी। इसके अलावा श्रमिकों के पंजीकरण का भी कोई रिकार्ड नहीं था। मनरेगा में गड्‌ढा खोदो और भरो होता था केंद्र में यूपीएस सरकार के दौरान मनरेगा एक ऐसी योजना बनकर रह गई थी, जिसकी उद्देश्य केवल गड्‌ढा खोदना और फिर उसको भर देना। इससे ज्यादा कोई काम नहीं इस योजना के तहत नहीं किया गया। कैग की रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है। सीएम सैनी ने कहा कि ये योजना सिर्फ भ्रष्टाचार का जरिया बन चुकी थी। इसमें कोई गरीब व्यक्ति को लाभ नहीं मिल रहा था।