हिसार : एचएसबी की शोधार्थी मोनिका अल्हान के शोध पत्र को मिला सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र का अवार्ड
- Vijesh Sharma
- Jun 06, 2026

12 शोधार्थियों नेआईआईएम काशीपुर में आयोजित कॉन्फ्रेंस में लिया भागकुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई से मिले शोधार्थी हिसार, 06 जून । गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस (एचएसबी) के शोधार्थियों ने आईआईएम काशीपुर में आयोजित कॉन्फ्रेंस में शानदार प्रदर्शन किया है। इस कॉन्फ्रेंस में एचएसबी के 12 शोधार्थियों ने भाग लिया और दस शोध पत्र प्रस्तुत किए। शोधार्थी मोनिका अल्हान के शाेध पत्र को सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र घोषित किया गया। कॉन्फ्रेंस में भाग लेने वाले शोधार्थी कुलपति प्रो. नरसीराम बिश्नोई से मिले। इस अवसर पर एसएसबी के निदेशक प्रो. संजीव कुमार भी उपस्थित रहे।कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने शनिवार काे इस उपलब्धि के लिए विभाग तथा शोधार्थियों को बधाई दी तथा उन्हें भविष्य में और उत्कृष्ट शोध करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शोधार्थियों से कहा कि शोध समाज उपयोगी होना चाहिए। इसी से विश्वविद्यालय का ‘एच’ इनडेक्स बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय में एक मजबूत इको सिस्टम तैयार करना है, जिससे विश्वविद्यालय का नाम न केवल देश में बल्कि पूरे विश्व पटल पर स्थापित हो।एचएसबी के निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि एक महीने की अवधि में ही मोनिका का शोधपत्र दूसरी बार श्रेष्ठ शोध पत्र घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि काॅन्फ्रेंस में शोधार्थियों ने मेटावर्स और अन्य उभरती तकनीकों जैसे समकालीन विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। विशेष रूप से मेटावर्स एक उन्नत तकनीक के रूप में उभर रहा है, जिस पर शोध किया जा रहा है कि कर्मचारी जब मेटावर्स आधारित वातावरण में काम करते हैं, तो उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके क्या लाभ है? साथ ही कर्मचारी अपनी मानसिक स्थिति को कैसे संतुलित कर सकते हैं।कॉन्फ्रेंस के दौरान शोधार्थियों ने न केवल अपने शोध प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए, बल्कि अन्य प्रतियोगियों और विशेषज्ञों के साथ संवाद कर नई-नई तकनीकों और शोध पद्धतियों को भी सीखा। एचएसबी में कुल 94 शोधार्थी हैं, जो अन्य विश्वविद्यालयों की तुलना में सबसे अधिक हैं। एचएसबी के शोधार्थी पीएलएस-एसइएम, एसटीएटीए तथा आर जैसे आधुनिक सॉफ्टवेयर पर भी बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं।प्रो. संजीव कुमार ने बताया कि एसएसबी में शोध को बढ़ावा देने के लिए मजबूत इको सिस्टम तैयार किया गया है। शोधार्थियों के लिए हर छह महीनें में कम से कम एक बार कॉन्फ्रेंस में भाग लेना अनिवार्य है। ताकि शोधार्थी नई तकनीकों और शोध गतिविधियों से अपडेट रहें। शोधार्थियों को वर्ष में एक बार अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

