100 पूर्व सैनिकों को लद्दाख पर्यावरण संरक्षण बल (ईपीएफ) में किया गया तैनात

लेह, 04 जुलाई (हि.स.)। लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और उसकी रक्षा करने के उद्देश्य से शुरू की गई अपनी तरह की पहली पहल के तहत शनिवार को 100 पूर्व सैनिकों को लद्दाख पर्यावरण संरक्षण बल (ईपीएफ) में तैनात किया गया।

पूर्व सैनिकों को उनके गंतव्य तक ले जाने वाले वाहनों को हरी झंडी दिखाते हुए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि लद्दाख में दुनिया के सबसे नाजुक उच्च-ऊंचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद हैं और यह कई लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों का घर है जिन्हें उच्चतम स्तर की सुरक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बढ़ते पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी होनी चाहिए और ईपीएफ मानव गतिविधियों और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लोगों का मार्गदर्शन भी करेगा।

उन्होंने कहा कि ईपीएफ हमारे पूर्व सैनिकों के अनुशासन, ईमानदारी और इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को एकजुट करता है। मुझे विश्वास है कि वे न केवल पर्यावरण और वन्यजीव कानूनों के उल्लंघन को रोकेंगे बल्कि लद्दाख भर में स्वच्छता जैव विविधता संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन के राजदूत भी बनेंगे।

उपराज्यपाल ने ईपीएफ सदस्यों को शपथ भी दिलाई जिसमें लद्दाख के पर्यावरण, जंगलों, वन्यजीवों और जैव विविधता की रक्षा में अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि प्रत्येक ईपीएफ सदस्य ने अपने निजी जीवन में एकल-उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने और अपने परिवार, मित्रों और स्थानीय समुदायों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने की प्रतिज्ञा भी ली।

सेना, अर्धसैनिक बलों और लद्दाख स्काउट्स के पूर्व सैनिकों से युक्त ईपीएफ कर्मियों को केंद्र शासित प्रदेश के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा ताकि अवैध ऑफ-रोडिंग की बढ़ती घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखी जा सके जो वन्यजीवों के लिए खतरा और लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा रही हैं। ईपीएफ को मजबूत करने के लिए इन पूर्व सैनिकों को अपने निर्धारित क्षेत्रों में किसी भी ऐसे उल्लंघन के लिए मौके पर ही चालान जारी करने का अधिकार दिया गया है।

प्रवक्ता ने बताया कि यह अनूठी पहल लद्दाख के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इलाकों में अवैध ऑफ-रोडिंग, संरक्षित क्षेत्रों के भीतर अनाधिकृत शिविर, वन्यजीवों को परेशान करने और प्रदूषण की बढ़ती घटनाओं के जवाब में शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों की तैनाती का उद्देश्य पर्यावरण और वन्यजीव कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना है। ईपीएफ को विशेष रूप से संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों के भीतर होने वाले उल्लंघनों को रोकने का दायित्व सौंपा गया है जैसे कि वन्यजीवों का पीछा करना और उन्हें परेशान करना, कूड़ा फेंकना, एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक का उपयोग करना, प्लास्टिक कचरा खुले में फेंकना और अन्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियाँ। पर्यावरण प्रवर्तन को मजबूत करने के अलावा यह पहल पूर्व सैनिकों के लिए एक सार्थक पुनर्वास उपाय के रूप में भी काम करती है जिससे उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज की सेवा जारी रखने का अवसर मिलता है।

प्रवक्ता ने बताया कि प्रत्येक ईपीएफ सदस्य को उनके मूल या निर्दिष्ट क्षेत्रों में तैनात रहते हुए 25,000 रुपये का निश्चित मासिक पारिश्रमिक प्राप्त होगा जिससे स्थानीय भूभाग से उनकी परिचितता के माध्यम से प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी।

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