योल वेद मन्दिर में यज्ञानुष्ठान का 47वां दिन-स्वामी राम स्वरूप जी ने सामवेद से दिया ज्ञान और भक्ति का संदेश

47th Day of Yajna at Yol Veda Temple - Swami Ram Swarup Ji imparted the message of knowledge and devotion from the Samaveda


कठुआ, 28 मई । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 47वें दिन योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने सामवेद के प्रथम मन्त्र से श्रद्धालुओं को गहन आध्यात्मिक उपदेश दिया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को निरंतर परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमारे हृदय में ज्ञान और भक्ति का प्रकाश करें। साथ ही वेदों के अनुसार शुभ कर्म और सच्ची उपासना के माध्यम से ही परमेश्वर को प्रसन्न कर अपने हृदय में प्रकट किया जा सकता है। स्वामी जी ने सामवेद मन्त्र 350 पर विशेष प्रकाश डालते हुए बताया कि जिज्ञासुओं को आपस में मिलकर शुद्ध सामगान और पवित्र मन्त्रों के माध्यम से परमेश्वर की स्तुति करनी चाहिए। ऐसा करने से परमेश्वर प्रसन्न होकर अपने शुद्ध आशीर्वाद प्रदान करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परमेश्वर निराकार, शुद्ध और सत्य स्वरूप है। उसे किसी प्रकार से पवित्र करने की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि वह स्वयं ही शुद्ध और स्वयंभू है।

स्वामी जी ने यजुर्वेद मन्त्र 40/8 का उल्लेख करते हुए कहा कि परमेश्वर स्वयंभू है अर्थात वह अपने आप से ही विद्यमान है। चारों वेदों में इसी एक परमेश्वर की वेदानुसार उपासना करने का संदेश दिया गया है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के उपदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और वेद ज्ञान के महत्व को समझा।

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