अंबुबासी मेला, भारत सेवाश्रम संघ ने लगाया दो दिवसीय सेवा शिविर

यहाँ इस समाचार का एक नया और अधिक आकर्षक आकर्षक हेडलाइन (Headline) के साथ हिंदी न्यूज़ फॉर्मेट प्रस्तुत है: अंबुबाची मेला: भारी बारिश भी नहीं डिगा सकी हौसला, पांडु में भारत सेवाश्रम संघ ने लगाया दो दिवसीय सेवा शिविर मालीगांव, 24 जून: हर वर्ष की तरह इस बार भी अंबुबाची मेले में तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए भारत सेवाश्रम संघ पूरी निष्ठा के साथ आगे आया है। मेले के पावन अवसर पर संघ द्वारा पांडु केबिन इलाके में दो दिवसीय विशेष सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के माध्यम से देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के बीच सूखा भोजन (मुरमुरा, बिस्कुट), शुद्ध पेयजल और विभिन्न प्रकार के फलों का वितरण किया गया। मौसम की मार पर भारी पड़ी 'मानव सेवा' पिछले दिन सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश भी संघ के सेवा कार्यों को रोक नहीं सकी। प्रतिकूल मौसम के बावजूद स्वयंसेवकों ने बारिश की परवाह किए बिना निरंतर अपनी सेवाएं जारी रखीं। सेवा के प्रति उनके इस समर्पण, अनुशासन और जज्बे ने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया। कुशल नेतृत्व और स्वयंसेवकों का समर्पण इस पूरे महायज्ञ को सफल बनाने में भारत सेवाश्रम संघ की पांडु शाखा के प्रधान स्वामी वरुणानंदजी महाराज और सुब्रत महाराज ने मुख्य भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में संघ के उत्साही और समर्पित महिला व पुरुष स्वयंसेवकों ने दिन-रात एक कर तीर्थयात्रियों की हर संभव मदद की। यही समाज की वास्तविक संस्कृति है शिविर में आए अनगिनत श्रद्धालुओं ने भारत सेवाश्रम संघ के इस मानवीय कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की। श्रद्धालुओं का कहना था कि धार्मिक उत्सवों के बीच नि:स्वार्थ मानव सेवा का यह दृश्य न केवल समाज को एक सकारात्मक संदेश देता है, बल्कि अंबुबाची मेले के आध्यात्मिक महत्व को भी कई गुना बढ़ा देता है।यहाँ इस समाचार का एक नया और अधिक आकर्षक आकर्षक हेडलाइन (Headline) के साथ हिंदी न्यूज़ फॉर्मेट प्रस्तुत है: अंबुबाची मेला: भारी बारिश भी नहीं डिगा सकी हौसला, पांडु में भारत सेवाश्रम संघ ने लगाया दो दिवसीय सेवा शिविर मालीगांव, 24 जून: हर वर्ष की तरह इस बार भी अंबुबाची मेले में तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए भारत सेवाश्रम संघ पूरी निष्ठा के साथ आगे आया है। मेले के पावन अवसर पर संघ द्वारा पांडु केबिन इलाके में दो दिवसीय विशेष सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के माध्यम से देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के बीच सूखा भोजन (मुरमुरा, बिस्कुट), शुद्ध पेयजल और विभिन्न प्रकार के फलों का वितरण किया गया। मौसम की मार पर भारी पड़ी 'मानव सेवा' पिछले दिन सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश भी संघ के सेवा कार्यों को रोक नहीं सकी। प्रतिकूल मौसम के बावजूद स्वयंसेवकों ने बारिश की परवाह किए बिना निरंतर अपनी सेवाएं जारी रखीं। सेवा के प्रति उनके इस समर्पण, अनुशासन और जज्बे ने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया। कुशल नेतृत्व और स्वयंसेवकों का समर्पण इस पूरे महायज्ञ को सफल बनाने में भारत सेवाश्रम संघ की पांडु शाखा के प्रधान स्वामी वरुणानंदजी महाराज और सुब्रत महाराज ने मुख्य भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में संघ के उत्साही और समर्पित महिला व पुरुष स्वयंसेवकों ने दिन-रात एक कर तीर्थयात्रियों की हर संभव मदद की। यही समाज की वास्तविक संस्कृति है शिविर में आए अनगिनत श्रद्धालुओं ने भारत सेवाश्रम संघ के इस मानवीय कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की। श्रद्धालुओं का कहना था कि धार्मिक उत्सवों के बीच नि:स्वार्थ मानव सेवा का यह दृश्य न केवल समाज को एक सकारात्मक संदेश देता है, बल्कि अंबुबाची मेले के आध्यात्मिक महत्व को भी कई गुना बढ़ा देता है।

गुवाहाटी, 24 जून (हि.स.)। नीलाचल पहाड़ पर स्थित विश्व विख्यात अंबुबासी मेले में तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए भारत सेवाश्रम संघ पूरी निष्ठा के साथ आगे आया है। मेले के पावन अवसर पर संघ द्वारा नगर के पांडु केबिन इलाके में दो दिवसीय विशेष सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के माध्यम से देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के बीच सूखा भोजन (मुरमुरा, बिस्कुट), शुद्ध पेयजल और विभिन्न प्रकार के फलों का वितरण किया गया।

पिछले दिन सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश भी संघ के सेवा कार्यों को रोक नहीं सकी। प्रतिकूल मौसम के बावजूद स्वयंसेवकों ने बारिश की परवाह किए बिना निरंतर अपनी सेवाएं जारी रखीं। सेवा के प्रति उनके इस समर्पण, अनुशासन और जज्बे ने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।

इस पूरे महायज्ञ को सफल बनाने में भारत सेवाश्रम संघ की पांडु शाखा के प्रधान स्वामी वरुणानंदजी महाराज और सुब्रत महाराज ने मुख्य भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में संघ के उत्साही और समर्पित महिला व पुरुष स्वयंसेवकों ने दिन-रात एक कर तीर्थयात्रियों की हर संभव मदद की।

शिविर में आए अनगिनत श्रद्धालुओं ने भारत सेवाश्रम संघ के इस मानवीय कार्य की प्रशंसा की। श्रद्धालुओं का कहना था कि धार्मिक उत्सवों के बीच नि:स्वार्थ मानव सेवा का यह दृश्य न केवल समाज को एक सकारात्मक संदेश देता है, बल्कि अंबुबासी मेले के आध्यात्मिक महत्व को भी कई गुना बढ़ा देता है।

   

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