एक्वाकल्चर बीमा योजना का लाभ उठाएं, मानसून के दौरान ट्राउट मत्स्य पालक रहें सतर्क: नीतू सिंह
- DSS Admin
- Jul 04, 2026
मंडी, 04 जुलाई (हि.स.)। मत्स्य मंडल मंडी्डी की सहायक निदेशक नीतू सिंह ने ट्राउट मत्स्य पालकों से मानसून के मौसम में विशेष सतर्कता बरतने तथा अपनी ट्राउट पालन इकाइयों को सुरक्षित रखने की अपील की है।
उन्होंने बताया कि इस मौसम में भारी वर्षा, बाढ़, भूस्खलन, मलबा (सिल्ट), जल प्रदूषण, जल प्रवाह में अचानक वृद्धि तथा विभिन्न रोगों के कारण ट्राउट पालन इकाइयों को भारी आर्थिक क्षति होने की आशंका रहती है। ऐसी परिस्थितियों में प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के अंतर्गत संचालित एक्वाकल्चर बीमा योजना मत्स्य पालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, प्रदूषण एवं अन्य निर्धारित जोखिमों से होने वाली क्षति का बीमा संरक्षण उपलब्ध करवाया जाता है। योजना में दो प्रकार के बीमा विकल्प उपलब्ध हैं। पहला बेसिक बीमा, जिसमें गैर-रोकथाम योग्य जोखिमों का कवरेज मिलता है, तथा दूसरा समग्र बीमा, जिसमें रोगों से होने वाली क्षति का भी बीमा संरक्षण शामिल है।
नीतू सिंह ने जानकारी दी कि योजना के अंतर्गत बीमा प्रीमियम पर 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि (निर्धारित सीमा तक) प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला लाभार्थियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन का लाभ भी दिया जाता है। यह योजना ट्राउट रेसवे सहित विभिन्न मत्स्य पालन प्रणालियों के लिए उपलब्ध है।
उन्होंने मानसून के दौरान ट्राउट मत्स्य पालकों को सावधानियाँ अपनाने की सलाह भी दी है। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालक रेसवे एवं जल निकासी व्यवस्था का नियमित निरीक्षण करें, जल की गुणवत्ता एवं जल प्रवाह पर निगरानी रखें। इसके अतिरिक्त मलबा, बाढ़ एवं जल प्रदूषण से बचाव के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें। मछलियों में किसी भी प्रकार के रोग के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत मत्स्य विभाग से संपर्क करें।
उन्होंने सभी ट्राउट मत्स्य पालकों से आग्रह किया कि वे संभावित आर्थिक क्षति से बचाव के लिए समय रहते प्रधान मंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के अंतर्गत उपलब्ध एक्वाकल्चर बीमा योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी एवं बीमा प्रक्रिया के लिए अपने निकटतम मत्स्य अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
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