जलपाईगुड़ी में अवैध बालू खनन पर कार्रवाई, इलाके में लौटी राहत

जलपाईगुड़ी,13 मई (हि.स.)। सत्ता परिवर्तन के बाद जलपाईगुड़ी के रंगधामाली और पहाड़पुर इलाके में तीस्ता नदी के किनारे चल रहे अवैध बालू खनन पर रोक लगने से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। वर्षों से चल रहे इस अवैध कारोबार के बंद होने के बाद अब सड़कों पर धूल और डंपरों की आवाजाही से लोगों को निजात मिली है।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पहले गोशाला मोड़ से रंगधामाली जाने वाली सड़क पर भारी डंपरों के कारण धूल और कंपन से लोगों का जीना मुश्किल हो गया था। अब वहां हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय से कब्जे में रही खेती की जमीन भी अब वापस मिलने लगी है, जिससे वे फिर से खेती शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं।

हाल ही में प्रशासन ने उप-मंडल अधिकारी मोइन अहमद के नेतृत्व में छापेमारी कर एक अवैध खनन स्थल से पोकलेन मशीन जब्त की। हालांकि इस दौरान कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी। प्रशासन का कहना है कि इलाके में अवैध रूप से बालू निकाला जा रहा था और इस पर लगातार नजर रखी जा रही है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस अवैध खनन से हर रात बड़ी संख्या में डंपरों के जरिए बालू जलपाईगुड़ी और सिलीगुड़ी सहित आसपास के इलाकों में भेजा जाता था। एक डंपर बालू की कीमत पांच से दस हजार रुपये तक बताई जा रही है, और हर रात दर्जनों डंपर बालू की तस्करी होती थी।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण के कारण लंबे समय तक इस अवैध कारोबार पर कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन सरकार बदलने के बाद अब प्रशासन सक्रिय हुआ है और लगातार छापेमारी कर रहा है।

इलाके के लोगों का कहना है कि अवैध खनन बंद होने से न सिर्फ पर्यावरण को राहत मिलेगी, बल्कि सड़क हादसों और रातभर होने वाले शोर-शराबे से भी छुटकारा मिलेगा।

   

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