(अपडेट) रूपकोंवर ज्योतिप्रसाद अगरवाला को मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, कहा- असम की सांस्कृतिक चेतना को दी नई दिशा
- DSS Admin
- Jun 17, 2026
गुवाहाटी, 17 जून (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने बुधवार को रूपकोंवर ज्योतिप्रसाद अगरवाला की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य, संगीत, रंगमंच और सिनेमा के माध्यम से आधुनिक असम की सांस्कृतिक पहचान और चेतना को आकार दिया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर साझा संदेश में ज्योतिप्रसाद अगरवाला को असमिया संस्कृति का पुरोधा बताते हुए कहा कि वे अपने समय से कहीं आगे की सोच रखने वाले दूरदर्शी व्यक्तित्व थे। उन्होंने वर्ष 1935 में ‘जयमति’ के निर्माण के साथ असमिया सिनेमा की नींव रखी और नाटककार, कवि तथा संगीतकार के रूप में समाज को समृद्ध किया।
डॉ. सरमा ने कहा कि ‘ज्योति संगीत’ आज भी उनकी अद्वितीय कलात्मक प्रतिभा और क्रांतिकारी सोच का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि ज्योतिप्रसाद अगरवाला ने केवल कला का सृजन ही नहीं किया, बल्कि असम की आधुनिक सांस्कृतिक चेतना को भी नई दिशा प्रदान की।
17 जून 1903 को वर्तमान डिब्रूगढ़ जिले के तामुलबाड़ी चाय बागान में जन्मे ज्योतिप्रसाद अगरवाला को आधुनिक असमिया संस्कृति के प्रमुख शिल्पकारों में गिना जाता है।
कवि, नाटककार, गीतकार, संगीतकार, फिल्म निर्माता और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उन्होंने बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दौर में असम के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्ष 1935 में उनकी फिल्म ‘जयमति’ के प्रदर्शित होने के साथ असमिया सिनेमा का इतिहास शुरू हुआ। इस फिल्म का निर्माण, निर्देशन और पटकथा लेखन स्वयं ज्योतिप्रसाद अगरवाला ने किया था। यह फिल्म आज भी राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।
संगीत के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय है। उनके द्वारा रचित और संगीतबद्ध सैकड़ों गीतों का संग्रह ‘ज्योति संगीत’ आज भी अपनी देशभक्ति, मानवीय मूल्यों और साहित्यिक गहराई के कारण लोगों के बीच विशेष स्थान रखता है।
कलात्मक उपलब्धियों के साथ-साथ उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भागीदारी निभाई और साहित्य तथा संगीत को सामाजिक जागरण एवं राष्ट्रीय चेतना के सशक्त माध्यम के रूप में प्रयोग किया।
उनकी जयंती पर हर वर्ष असम भर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, साहित्यिक आयोजनों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन कर उनके योगदान को स्मरण किया जाता है।
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