स्वास्थ्य सेवाओं में प्रभावी संवाद से मरीजों का भरोसा बढ़ता है : विजय चौधरी

पटना, 05 जुलाई (हि.स.)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना में रविवार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं में संवाद विषय पर राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान चिकित्सा सेवाओं में प्रभावी संवाद, मरीज-केंद्रित उपचार और चिकित्सकों की संवाद क्षमता को सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि प्रभावी संवाद मरीज और चिकित्सक के बीच विश्वास का सबसे मजबूत आधार होता है। आज संवाद कौशल हर पेशे के लिए आवश्यक है, लेकिन चिकित्सा क्षेत्र में इसका महत्व सबसे अधिक है। यदि चिकित्सक मरीज की बात ध्यानपूर्वक सुनें और उसे सरल एवं स्पष्ट भाषा में बीमारी तथा उपचार की जानकारी दें, तो मरीज का भरोसा बढ़ता है और उपचार भी अधिक प्रभावी बनता है।

उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ संवाद वही है, जिसमें व्यक्ति अपनी बात स्पष्ट रूप से सामने रख सके और दूसरे की बात को भी संवेदनशीलता के साथ समझ सके। चिकित्सा पेशे की सफलता भी इसी पर निर्भर करती है कि मरीज चिकित्सक के व्यवहार, संवाद और उपचार से संतुष्ट होकर स्वस्थ महसूस करे।

उपमुख्यमंत्री ने इस विषय पर राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पटना एम्स और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड की सराहना की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं में संवाद कौशल का महत्व और बढ़ेगा तथा चिकित्सा शिक्षा में भी इस विषय पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा, ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए। औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए। उद्धृत करते हुए कहा कि मधुर और संवेदनशील व्यवहार मरीज का मनोबल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अभिजात सेठ ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कहा कि चिकित्सा शिक्षा में मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण और संवाद कौशल को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानवीय संवेदनाएं और प्रभावी संवाद भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने मरीज-केंद्रित संवाद, चिकित्सकीय व्यवहार में सहानुभूति, कठिन परिस्थितियों में प्रभावी संवाद तथा आधुनिक संवाद प्रशिक्षण जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में चिकित्सकों, चिकित्सा विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।

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