भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के अवशेष मप्र के सांची में फिर किए जाएंगे स्थापित
- DSS Admin
- Jun 11, 2026

नई दिल्ली, 11 जून (हि.स.)। भगवान बुद्ध के दो सबसे प्रमुख और प्रिय शिष्यों- अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन के पवित्र बौद्ध अवशेषों को मंगोलिया की 10 दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा के बाद गुरुवार को मध्य प्रदेश के रायसेन जिला स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची ले जाया गया।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अनुसार ये पवित्र अवशेष मूल रूप से सांची के स्तूपों में ही संरक्षित हैं, जहां इन्हें एक बार फिर पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ पुनः स्थापित किया जाएगा। इससे पहले बुधवार को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से पवित्र अवशेषों को मंगोलिया की राजधानी उलानबटोर से दिल्ली वापस लाया गया। दिल्ली आगमन पर उनका भव्य स्वागत किया गया। आज अवशेषों की रवानगी के दौरान अभिनेत्री एवं लोकसभा सदस्य कंगना रनौत और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने हवाई अड्डे पहुंचकर अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की।
इस यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना भी पवित्र अवशेषों के साथ उपस्थित रहे। नेताओं ने कहा कि इस यात्रा ने भारत और मंगोलिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान की है।
इन पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी मंगोलिया के गंडन तेगचेनलिंग मठ के विशेष अनुरोध पर आयोजित की गई थी। संस्कृति मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय ने मध्य प्रदेश सरकार, श्रीलंका की महाबोधि सोसाइटी और आईबीसी के सहयोग से 31 मई से 9 जून तक इस सफल प्रदर्शनी का संचालन किया।
मंगोलियाई बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आम जनता के लिए खोली गई इस प्रदर्शनी में जनसैलाब देखने को मिला। लगभग 34 लाख की कुल आबादी वाले मंगोलिया में 10 दिनों के भीतर करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने मठ पहुंचकर पवित्र अवशेषों के दर्शन किए।
उल्लेखनीय है कि इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अक्टूबर 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा के दौरान की थी। इसके बाद 30 मई को असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने इन अवशेषों को मंगोलिया के शिक्षा मंत्री एनख-अमगलान और गंडांटेगचेनलिंग मठ के खंबा नोमुन खान गेशे लहारम्पा डी जावज़ांडोरज को समारोहपूर्वक सौंपा था।
भारत से बाहर यह बेहद दुर्लभ अवसर है जब इन पवित्र अवशेषों को विदेश भेजा गया हो। अब तक ये पावन अवशेष केवल थाईलैंड और मंगोलिया ही भेजे गए हैं।
-------------

