बिहार एसटीएफ की टीम ने कुख्यात पांडव गिरोह के सरगना संजय सिंह को किया गिरफ्तार

पटना, 30 जून (हि.स.)।

बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की विशेष टीम ने पटना जिला के कुख्यात वांछित अपराधकर्मी एवं बिहार के टॉप कुख्यात अपराधियों कि सूची में शामिल पाण्डव सेना के सरगना संजय सिंह, पिता-स्व रमेश सिंह, ग्राम- निमा, थाना- मसौढ़ी, जिला-पटना को पटना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है।

लंबे समय से फरार चल रहे संजय सिंह को विशेष अभियान के तहत गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, 30 जून 2026 को पुलिस उपाधीक्षक अबु सैफी मुर्तजा के नेतृत्व में पटना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे बिहटा थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी संजय सिंह, स्वर्गीय रमेश सिंह का पुत्र है और पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत निमा गांव का रहने वाला है। वह बिहार के सबसे वांछित अपराधियों में शामिल था और कई वर्षों से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी में था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, नरसंहार, रंगदारी के लिए हत्या, अवैध खनन, भू-माफिया गतिविधियों सहित कई गंभीर अपराधों के आरोप दर्ज हैं।

पुलिस के अनुसार, संजय सिंह बिहटा थाना कांड संख्या 672/2025 में भी वांछित था। यह मामला एके-47 की बरामदगी से जुड़ा है। इस मामले में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएलएस) की विभिन्न धाराओं तथा आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। इसी कारण गिरफ्तारी के बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए बिहटा थाना को सौंप दिया गया।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजय सिंह का आपराधिक इतिहास लगभग तीन दशक पुराना है। उसके खिलाफ अब तक 26 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी, अपहरण, लूट, अवैध हथियार रखना, आर्म्स एक्ट, आपराधिक षड्यंत्र, धमकी, मारपीट, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम और बिहार उत्पाद अधिनियम जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।

उसके खिलाफ दर्ज मामलों में पटना जिले के मसौढ़ी, धनरुआ, पुनपुन, बिहटा, कृष्णापुरी और पत्रकार नगर थानों के अलावा जहानाबाद, भागलपुर, हजारीबाग, रांची और झारखंड के अन्य थानों में भी मुकदमे दर्ज हैं। इससे साफ है कि उसका आपराधिक नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि दूसरे राज्यों तक भी फैला हुआ था।

पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, संजय सिंह पर वर्ष 1996 से लेकर वर्ष 2025 तक लगातार गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होते रहे। शुरुआती मामलों में हत्या और आर्म्स एक्ट के मुकदमे शामिल हैं।

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