2014 से पहले शरण लेने वाले पात्र लोगों को नागरिकता देना भारत की नैतिक जिम्मेदारी: संजय सरावगी
- DSS Admin
- Jul 07, 2026
पटना, 07 जुलाई (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) उन पीड़ित हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को न्याय दिलाने का कानून है, जो वर्ष 2014 से पहले पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर भारत में शरण लेने के लिए मजबूर हुए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना भारत की नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी है।
प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि केंद्र सरकार सीएए के प्रावधानों के अनुरूप प्राप्त होने वाले सभी वैध आवेदनों पर कार्रवाई कर रही है। जहां-जहां कानून के अनुसार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, वहां भारत सरकार पात्र लोगों को नागरिकता प्रदान कर रही है। यह पूरी प्रक्रिया संविधान और कानून के दायरे में पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है।
संजय सरावगी ने जोर देकर स्पष्ट कहा कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से सीएए लागू करने का संकल्प लिया था। भाजपा का घोषणा पत्र केवल चुनावी दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता के प्रति पार्टी की नीति और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा जो वादा करती है, उसे पूरा करने का काम भी करती है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में सीएए के प्रावधानों के अनुरूप प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और पात्र लोगों को नागरिकता देने का कार्य किया जा रहा है। भाजपा सरकार समाज के प्रत्येक पीड़ित और वंचित वर्ग को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा राष्ट्रहित, मानवता और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि सीएए के माध्यम से वर्षों से भारत में शरण लेकर रह रहे पात्र लोगों को सम्मानजनक जीवन और नागरिक अधिकार प्राप्त होंगे तथा भाजपा अपने प्रत्येक संकल्प को इसी तरह पूरा करती रहेगी।
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