अब पेनिसिलिन इंजेक्शन से नहीं होगा दर्द, आरएमएल में चल रहा लिडोकेन पर शोध

नई दिल्ली, 04 जुलाई (हि.स.)।

रूमेटिक हार्ट डिजीज (आरएचडी) से पीड़ित बच्चों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में चल रहे एक शोध से पेनिसिलिन के दर्दनाक इंजेक्शन को कम तकलीफदेह बनाने की उम्मीद जगी है। यदि यह प्रयास सफल रहा तो बच्चों के लिए लंबे समय तक इलाज जारी रखना आसान हो सकेगा।

आरएमएल अस्पताल के बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. दिनेश कुमार यादव ने बताया कि आरएचडी से पीड़ित बच्चों को दिल को सुरक्षित रखने के लिए कई वर्षों तक हर 3-4 सप्ताह में बेंजाथीन पेनिसिलिन-जी (बीपीजी) का इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। यह इंजेक्शन काफी दर्दनाक होता है। दर्द के डर से कई बच्चे अस्पताल आने से कतराने लगते हैं और कुछ परिवार इलाज भी बीच में छोड़ देते हैं।

इसी समस्या को दूर करने के लिए अस्पताल में चल रहे शोध में बीपीजी इंजेक्शन के साथ लिडोकेन नामक दर्द कम करने वाली दवा मिलाकर दी जा रही है। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं और बच्चों में इंजेक्शन से होने वाले दर्द में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

डॉ. यादव ने बताया कि यह तरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिशों पर आधारित है और अफ्रीका समेत कई देशों में सफल साबित हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि दर्द कम होने से बच्चों में इंजेक्शन का भय घटेगा, उपचार का नियमित पालन बढ़ेगा और दिल के वाल्वों को होने वाले गंभीर नुकसान को रोका जा सकेगा। उन्होंने बताया कि

बेंजाथीन पेनिसिलिन-जी (बीपीजी) एक गाढ़ा और लंबे समय तक असर करने वाला इंजेक्शन है, जिसे मांसपेशियों में गहराई तक लगाया जाता है। इसकी गाढ़ी संरचना और बड़ी मात्रा के कारण इंजेक्शन लगाते समय तथा उसके बाद कई घंटों तक दर्द और अकड़न महसूस हो सकती है। यही वजह है कि कई बच्चे हर 3-4 सप्ताह में लगने वाले इस इंजेक्शन से घबराने लगते हैं और कभी-कभी इलाज भी बीच में छोड़ देते हैं। लेकिन इंजेक्शन में लिडोकेनको शामिल करने से बच्चों को दर्द कम होगा।

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