नई ईवी नीति को लेकर 2030 तक का रोडमैप तैयार, वाहनों के लिए अनिवार्य विद्युतीकरण : रेखा गुप्ता
- DSS Admin
- Jun 30, 2026
नई दिल्ली, 30 जून (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नई दिल्ली ईवी नीति बुधवार को (एक जुलाई) से लागू हो रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नई ईवी नीति को लेकर 2030 तक का रोडमैप तैयार कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की 2020 की ईवी नीति मुख्य रूप से प्रोत्साहन आधारित थी और इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना पूरी तरह स्वैच्छिक था। नई सरकार ने इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए प्रोत्साहनों के साथ विभिन्न वाहन श्रेणियों के लिए चरणबद्ध अनिवार्य विद्युतीकरण का स्पष्ट कार्यक्रम तैयार किया है, जिससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई गति मिलेगी। इसके साथ-साथ परिवहन व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव, चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार, मजबूत संस्थागत व्यवस्था और विभिन्न वाहन श्रेणियों के चरणबद्ध विद्युतीकरण का व्यापक कार्यक्रम तैयार किया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर 30,000 रुपये तक का खरीद प्रोत्साहन जारी रखा गया है। इसके साथ पहली बार पुराने वाहन को स्क्रैप कराने पर 10,000 रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। इतना ही नहीं एक अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के रूप में किया जाएगा। तिपहिया वाहनों के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। जहां पहले खरीद प्रोत्साहन 30,000 रुपये तक था, वहीं नई नीति में इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये तक कर दिया गया है। पुराने वाहन को स्क्रैप कराने पर 25,000 रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही 1 जनवरी 2027 से एल-5 श्रेणी के नए ऑटो रिक्शा का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के रूप में किया जाएगा, जिससे इस श्रेणी का पूर्ण इलेक्ट्रिक संक्रमण सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा कि नई नीति में पहली बार माल ढोने वाले वाहनों के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। पहले केवल सीमित संख्या में ई-कार्गो वाहनों को प्रोत्साहन और कुछ मार्गों पर नो-एंट्री समय से छूट का प्रावधान था। अब एन-1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर 1 लाख रुपये तक का खरीद प्रोत्साहन, पुराने वाहन को स्क्रैप कराने पर 50,000 रुपये तक का अतिरिक्त लाभ, एन-1 वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक पंजीकरण का प्रावधान और शुरुआती 1,000 एन-2 इलेक्ट्रिक ट्रकों को विशेष नो-एंट्री छूट दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति में वर्ष 2030 तक स्कूल बस बेड़े के 30 प्रतिशत हिस्से को इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पूर्ववर्ती नीति में चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने पर जोर था, लेकिन नई सरकार ने इसे और व्यापक बनाते हुए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) को नोडल एजेंसी बनाया है। इसके साथ सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म, ग्रिड प्लानिंग फ्रेमवर्क और बड़े पैमाने पर चार्जिंग नेटवर्क के विकास के लिए समर्पित प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति का संस्थागत ढांचा भी पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया गया है। जहां पहले केवल ईवी सेल और स्टेट ईवी बोर्ड था, वहीं अब परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में दिल्ली ईवी एपेक्स कमेटी, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी, पीएमसी सहयोग के साथ समर्पित ईवी सेल तथा सभी संबंधित विभागों की स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की गई हैं। बैटरी प्रबंधन के क्षेत्र में भी नई नीति महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई है। पहले केवल बैटरी रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की बात थी, जबकि अब बैटरी ट्रेसबिलिटी (निर्माण से लेकर रिसाइकल तक डिजिटल जानकारी), कलेक्शन सेंटर, एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (ईपीआर) का अनुपालन, पीपीपी मॉडल पर रीसाइक्लिंग व्यवस्था और एसओपी आधारित बैटरी प्रबंधन ढांचा विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने ईवी नीति की वित्तीय व्यवस्था को भी अधिक मजबूत बनाया है। पहले ईवी फंड मुख्य रूप से प्रदूषण उपकर, रोड टैक्स और अन्य शुल्कों पर आधारित था। अब इसके साथ पीएम ई-ड्राइव, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, राज्य सरकार के बजटीय प्रावधानों और ईसीसी फंड को भी जोड़ा गया है, जिससे नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल योजनाएं घोषित करने में विश्वास नहीं रखती, बल्कि समय की जरूरत के अनुसार उन्हें अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाकर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। दिल्ली ईवी पॉलिसी-2026 इसी सोच का परिणाम है। यह नीति केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दिल्ली के परिवहन तंत्र में व्यापक परिवर्तन लाकर स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ मोबिलिटी व्यवस्था की मजबूत नींव रखेगी।
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