करोल बाग में नकली ऑटो पार्ट्स के बड़े खेल का पर्दाफाश, तीन आरोपित गिरफ्तार

नई दिल्ली, 23 मई (हि.स.)। दिल्ली के ऑटो पार्ट्स कारोबार के बड़े केंद्र करोल बाग में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली सामान के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नामी ऑटो पार्ट्स कंपनी के नाम से बाजार में बेचे जा रहे 10,650 कथित नकली स्विच बरामद किए हैं। मामले में तीन कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपित विदेश से कम कीमत वाले स्विच मंगवाते थे और उन पर नामी कंपनी का ट्रेडमार्क लगाकर उन्हें असली बताकर बाजार में बेचते थे।

क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त संजीव यादव ने शनिवार को बताया कि यह पूरा कारोबार लंबे समय से संगठित तरीके से चलाया जा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और दिल्ली समेत अन्य राज्यों में भी इसकी सप्लाई की जा रही थी या नहीं।

सूचना मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने बिछाया जाल

पुलिस उपायुक्त के अनुसार क्राइम ब्रांच की एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (एआरएससी) की टीम को 19 मई को सूचना मिली थी कि करोल बाग की कुछ दुकानों में विदेशी निर्मित सस्ते ऑटो स्विच पर प्रतिष्ठित ब्रांड का ट्रेडमार्क लगाकर उन्हें बाजार में असली सामान बताकर बेचा जा रहा है।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए क्राइम ब्रांच ने इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी के नेतृत्व में एक टीम बनाई। जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित कंपनी के अधिकृत कानूनी प्रतिनिधियों को भी साथ लिया, ताकि मौके पर उत्पादों की पहचान की जा सके। उसके बाद पुलिस टीम ने करोल बाग इलाके की तीन थोक दुकानों पर एक साथ दबिश दी। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में नकली स्विच बरामद हुए। सबसे पहले पुलिस ने मल्होत्रा एंटरप्राइजेज पर कार्रवाई की। यहां से 8,500 कथित नकली स्विच बरामद किए गए। इसके बाद टीम ने कनक ऑटो स्पेयर्स में छापा मारा, जहां से 650 संदिग्ध डुप्लीकेट स्विच मिले। वहीं परी एंटरप्राइजेज से 1,500 कथित नकली स्विच बरामद किए गए। तीनों दुकानों से कुल 10,650 स्विच जब्त किए गए। पुलिस के अनुसार बरामद सामान पर प्रतिष्ठित कंपनी का नाम और ट्रेडमार्क अंकित था।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों की पहचान राजेश मल्होत्रा, सोम भूटानी और कमल रसवंत के रूप में हुई है। तीनों लंबे समय से ऑटो पार्ट्स के कारोबार से जुड़े हुए थे और पिछले 15 से 20 वर्षों से थोक व्यापार कर रहे थे। जांच में सामने आया है कि ब्रांडेड सामान पर ज्यादा मुनाफा मिलने के कारण आरोपितों ने कथित तौर पर अवैध तरीका अपनाया। पुलिस का दावा है कि विदेशी निर्मित सस्ते ऑटो पार्ट्स मंगवाकर उन पर नामी कंपनी का नाम उकेरा जाता था। इसके बाद सामान को असली उत्पाद बताकर बाजार में सप्लाई कर दिया जाता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इससे ग्राहकों को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ वाहन सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी पैदा हो सकते हैं, क्योंकि नकली उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित नहीं होती।

विदेशी कनेक्शन की भी जांच

पुलिस उपायुक्त के अनुसार क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच में पता चला है कि बरामद उत्पाद विदेश से आयात किए गए थे। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सामान किन माध्यमों से दिल्ली पहुंचता था और इसके पीछे कितना बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। जांच एजेंसियां सप्लाई चेन, आयात प्रक्रिया और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित नहीं हो सकता। वहीं पुलिस ने इस मामले में क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर संख्या 133/26 दर्ज की है। आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और कॉपीराइट एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

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