संपत्ति नहीं, संस्कार दें संतति को, सनातन संस्कार शिविर में संत दिग्विजय राम - गुडविल बनेगी वसीयत नहीं
- DSS Admin
- Jun 12, 2026
चित्तौड़गढ़, 12 जून (हि.स.)। शहर में ॐ तत्सत पारमार्थिक संस्था के तत्वावधान में सांवलिया विश्रांति गृह में चल रहे 10 दिवसीय सनातन संस्कार शिविर का भव्य समापन हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि रामस्नेही संत दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि संस्कार युक्त जीवन ही श्रेष्ठ है। माता-पिता संतान को संपत्ति की शिक्षा न दें, संपत्ति से तो केवल विल-वसीयत बनेगी, लेकिन सनातन धर्म के संस्कार दिए तो गुडविल-ख्याति बनेगी।
यहां समापन पर संत दिग्विजय राम ने कहा कि पुरुषोत्तम माह में लोग तीर्थों पर पुण्य अर्जित कर रहे हैं, लेकिन संस्था अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य विकास उपाध्याय के निर्देशन में इस शिविर में सारे तीर्थों का पुण्य अनुभूत हो रहा है, यह बड़े गर्व की बात है। उन्होंने हनुमान चालीसा की चौपाई 'विद्यावान गुणी अति चातुर' का उल्लेख कर बताया कि केवल शिक्षा योग्यता निर्धारित नहीं करती, जीवन में संस्कारों का महत्व सर्वोपरि है। संत ने वैदिक परंपराओं पर आधारित सनातन धर्म, अध्यात्म, संस्कार और ज्योतिष ज्ञान के प्रशिक्षण को जीवनोपयोगी बताया। सनातन परंपरा इतनी समृद्ध है कि केवल ज्योतिष गणनाओं से बड़ी से बड़ी खगोलीय घटनाओं का पूर्वानुमान किया जा सकता है। उन्होंने कहा। संत ने बटुकों और शिविरार्थियों से अर्जित ज्ञान को समाज में प्रसारित कर सनातन संस्कृति को मजबूत करने का आह्वान किया।
150 शिविरार्थियों ने लिया प्रशिक्षण
शिविर संयोजक ज्योतिषाचार्य विकास उपाध्याय ने प्रतिवेदन में बताया कि 11 वर्ष से अधिक आयु के राजस्थान व अन्य प्रांतों के 150 बटुक, बालक-बालिका, महिला-पुरुष शिविरार्थियों ने ज्ञानार्जन किया। प्रतिदिन सुबह जागरण, गुरुकुल परंपराओं का अभ्यास, वैदिक शास्त्रीय ज्ञान, धार्मिक अनुष्ठानों का अभ्यास, सामूहिक एकता व राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया। शिविर का लक्ष्य सदाचार युक्त राष्ट्र निर्माण के लिए पूरी पीढ़ी को संस्कारित करना है।
समारोह का शुभारंभ संत दिग्विजय राम ने सरस्वती पूजन व दीप प्रज्ज्वलन से किया। बालिकाओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। शिविरार्थी प्रीति चाष्टा व सागर पाराशर ने अनुभव साझा कर शिविर के ज्ञान को मूल्यवान बताया। आचार्य रजनीश दाधीच ने मंच संचालन किया। उन्होंने बताया कि शिविर में संस्कृत संभाषण, पर्यावरण, दैनिक जीवन की वस्तुओं के संस्कृत नामकरण की प्रदर्शनी भी लगी।
प्रशस्ति पत्र वितरित
समापन पर ओम प्रकाश उपाध्याय, पं. मदन मोहन उपाध्याय, विकास उपाध्याय व प्रो. सुशीला लढ्ढा ने शिविरार्थियों को प्रशस्ति पत्र दिए। प्रो. सुशीला लढ्ढा, प्रो. श्याम सुंदर पारीक व एडवोकेट ओम प्रकाश शर्मा ने भी संबोधित किया। संस्था सचिव पंडित कौशल शर्मा ने आभार व्यक्त किया। समारोह में अमरकंठ उपाध्याय, डॉ. योगेश व्यास, रमेश चंद्र चाष्टा, बद्रीलाल शर्मा, मधुसूदन शर्मा, गौरव त्यागी, हर्षवर्धन सिंह रूद, अनिल ईनाणी, मनोज पारीक सहित बड़ी संख्या में विप्रजन व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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