ताइवान में एशिया-प्रशांत मनोविज्ञान शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे बीएचयू के प्रो. तुषार सिंह

वाराणसी, 08 जून (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सामाजिक विज्ञान संकाय के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर तुषार सिंह ताइवान में एशिया-प्रशांत मनोविज्ञान शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। प्रोफेसर तुषार सिंह को ताइवान में आयोजित होने वाले 2026 एपीपीए समिट एंड कॉन्फ्रेंस में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए विशिष्ट प्रतिनिधि एवं आमंत्रित वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह सम्मेलन 17 से 19 जून 2026 तक नेशनल चेंग कुंग यूनिवर्सिटी, ताइनान, ताइवान में आयोजित होगा।

बीएचयू के जनसम्पर्क अधिकारी ने साेमवार काे यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह आमंत्रण ताइवानी साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (टीपीए) द्वारा दिया गया है। प्रो. सिंह इस सम्मेलन में नेशनल एकेडमी ऑफ साइकोलॉजी (एनएओपी), भारत के प्रतिनिधि के रूप में भाग लेंगे। सम्मेलन में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विभिन्न देशों के मनोवैज्ञानिक संगठनों के अध्यक्ष, वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रतिष्ठित विद्वान एवं प्रतिनिधि मनोविज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य, कल्याण, प्रौद्योगिकी तथा समाज से जुड़े समकालीन एवं भावी मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। सम्मेलन में प्रो. सिंह “अदृश्य आपदाएँ: भारतीय संदर्भ में लैंगिक-आधारित हिंसा, सामाजिक आघात और मनोसामाजिक लचीलापन (इनविज़िबल डिज़ास्टर्स: जेंडर-बेस्ड वायलेंस, सोशल ट्रॉमा, एंड साइकोसोशल रिज़िलिएंस इन द इंडियन कॉन्टेक्स्ट) विषय पर आमंत्रित व्याख्यान देंगे।

यह प्रस्तुति भारत में एसिड अटैक पीड़ितों, घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं, सामाजिक एवं लैंगिक अल्पसंख्यकों तथा कोविड-19 महामारी से प्रभावित कमजोर समुदायों पर किए गए उनके शोध पर आधारित है। इसमें यह प्रतिपादित किया जाएगा कि भेदभाव, सामाजिक बहिष्करण, कलंक एवं असमानताओं से उत्पन्न दीर्घकालिक सामाजिक पीड़ा भी एक प्रकार की “अदृश्य आपदा” है, जिसका मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक कल्याण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। व्याख्यानों के उपरांत प्रो. सिंह विभिन्न देशों के मनोवैज्ञानिक संगठनों के अध्यक्षों एवं वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष “वर्ल्ड कैफ़े” गोलमेज चर्चा में भी भाग लेंगे। इस चर्चा में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मनोविज्ञान के भविष्य, मनोवैज्ञानिक संगठनों की भूमिका, उभरती चुनौतियों तथा प्राथमिकताओं पर विचार किया जाएगा। इस अवसर पर प्रो. सिंह भारतीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, सामुदायिक सुदृढ़ता तथा समाजोन्मुख मनोविज्ञान के विषय में अपने विचार साझा करेंगे। बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस महत्वपूर्ण सहभागिता से न केवल प्रो. सिंह की शैक्षणिक उपलब्धियों को वैश्विक मान्यता मिली है, बल्कि इससे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा भारतीय मनोविज्ञान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।

   

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