असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में पारिस्थितिक संतुलन एवं वन्यजीव संरक्षण कार्यों को मिली गति
- DSS Admin
- Jun 22, 2026
नई दिल्ली, 22 जून (हि.स.)। दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में व्यापक स्तर पर पारिस्थितिक इको-रिस्टोरेशन वृक्षारोपण कार्यक्रम तथा वन्यजीव संरक्षण संबंधी विभिन्न पहलें संचालित की जा रही हैं। इन पहलों का उद्देश्य दिल्ली की पारिस्थितिकीय क्षमता को मजबूत करना, क्षतिग्रस्त भूमि का पुनर्स्थापन करना तथा देशी जैव विविधता का संरक्षण करना है। विभाग का वैज्ञानिक इको-रिस्टोरेशन कार्यक्रम दिल्ली के अरावली क्षेत्र में स्थित पूर्व खनन क्षेत्रों और अन्य क्षतिग्रस्त भूभागों को पुनः समृद्ध वन क्षेत्रों में परिवर्तित करने की दिशा में कार्यरत है। यह वृक्षारोपण अभियान देशी एवं रिज क्षेत्र के अनुकूल प्रजातियों पर केंद्रित है, जिसके अंतर्गत वैज्ञानिक योजना, उपयुक्त प्रजातियों का चयन, नियमित निगरानी और दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित किया जा रहा है।
इस बारे में पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य दिल्ली की सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक धरोहरों में से एक है और अरावली पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा है। हमारा उद्देश्य केवल वृक्षारोपण करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीकों से क्षतिग्रस्त भू-भागों को ऐसे वन पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित करना है, जो वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करें, वायु गुणवत्ता में सुधार लाएं और दिल्ली के पर्यावरण को सुदृढ़ बनाएं।”
कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि विभाग का वैज्ञानिक इको-रिस्टोरेशन कार्यक्रम दिल्ली के अरावली क्षेत्र में स्थित पूर्व खनन क्षेत्रों और अन्य क्षतिग्रस्त भूभागों को पुनः समृद्ध वन आवासों में परिवर्तित करने की दिशा में कार्यरत है। यह वृक्षारोपण अभियान देशी एवं रिज क्षेत्र के अनुकूल प्रजातियों पर केंद्रित है, जिसके अंतर्गत वैज्ञानिक योजना, उपयुक्त प्रजातियों का चयन, नियमित निगरानी तथा दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित किया जा रहा है।
कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह ने आगे कहा, “दक्षिणी रिज क्षेत्र में 10 लाख से अधिक देशी पौधों का रोपण दिल्ली के हरित आवरण को मजबूत करेगा और अरावली क्षेत्र के प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह अभियान देशी जैव विविधता के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए उन्नत हरित क्षेत्रों के निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए अभयारण्य में 218 जलस्रोत (वाटरहोल) विकसित किए गए हैं, ताकि विशेष रूप से ग्रीष्म ऋतु और जल संकट की परिस्थितियों में वन्यजीवों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। इन जलस्रोतों को वन्यजीवों के आवागमन मार्गों के समीप रणनीतिक रूप से विकसित किया गया है तथा इनमें नियमित रूप से स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जाता है।
इस संबंध में कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह ने कहा, “वन्यजीवों के संरक्षण के लिए जल उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर दिल्ली की गर्मियों के दौरान। अभयारण्य में विकसित किए गए जलस्रोत आवासीय गुणवत्ता को बेहतर बनाने और वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं।”
हाल ही में कैमरा ट्रैप और फील्ड सर्वेक्षणों के माध्यम से अभयारण्य में अनेक वन्यजीव प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इनमें भारतीय तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, चीतल, साही, विभिन्न सरीसृप तथा अनेक पक्षी प्रजातियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दिल्ली रिज क्षेत्र में बर्ड वॉचिंग ट्रेल, प्राकृतिक जल निकायों के संरक्षण तथा वृक्षारोपण प्रबंधन संबंधी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।
अभयारण्य परिसर में स्थित विभाग की प्रमुख भारत नर्सरी में वर्तमान में लगभग 6 लाख देशी पौधों का संवर्धन किया जा रहा है। इन पौधों का उपयोग वृक्षारोपण कार्यक्रमों, आवास पुनर्स्थापन परियोजनाओं, शहरी हरितीकरण पहलों तथा नागरिकों को निःशुल्क वितरण के लिए किया जा रहा है।
हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के साथ असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य का दौरा किया था। मुख्यमंत्री ने इसे दिल्ली की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहरों में से एक बताते हुए इसकी समृद्ध जैव विविधता का उल्लेख किया, जिसमें नीली झील के साथ तेंदुए, हिरण, नीलगाय तथा अनेक पक्षी प्रजातियां शामिल हैं। उन्होंने असोला क्षेत्र एवं दक्षिणी रिज में चल रहे व्यापक वृक्षारोपण और वन संरक्षण कार्यों की सराहना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए योग और प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव आवश्यक है। कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह ने यह भी घोषणा की कि दिल्ली सरकार आगामी जुलाई माह में ‘क्लीन दिल्ली, ग्रीन दिल्ली’ जन अभियान प्रारंभ करेगी, जिसके अंतर्गत पूरे शहर में 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य विद्यालयों, महाविद्यालयों, संस्थानों तथा आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करना है।
असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में संचालित पारिस्थितिक पुनर्स्थापन एवं संरक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्यावरणीय स्थिरता, जैव विविधता संरक्षण तथा पारिस्थितिकीय संतुलन को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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