डॉ.परमजीत सिंह के निलंबन का निर्णय न्यायोचित एवं स्वागतयोग्य : अभाविप

लखनऊ, 19 मई (हि.स.)। लखनऊ विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग से जुड़े अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील प्रकरण में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन किया था। इसके पश्चात विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई का स्वागत करते हुए परिषद इसे न्यायोचित, आवश्यक एवं संस्थागत जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है। कार्यपरिषद द्वारा उच्चस्तरीय अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर आरोपित शिक्षक डॉ. परमजीत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने का निर्णय जरूरी था, अभाविप यह स्पष्ट करती है कि छात्राओं की गरिमा, महिला सुरक्षा एवं अकादमिक शुचिता के प्रश्न पर किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं है।

यह प्रकरण केवल किसी एक छात्रा के उत्पीड़न अथवा शिक्षक आचरण के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की नैतिक विश्वसनीयता, परीक्षा प्रणाली की पवित्रता तथा शैक्षणिक वातावरण की सुरक्षा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ विषय है। प्रथम दृष्टया सामने आए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं, जिनमें शिक्षक पद की मर्यादा का उल्लंघन, छात्रा के साथ कथित अमर्यादित व्यवहार, परीक्षा प्रश्न-पत्र से जुड़ी गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न तथा संस्थागत नैतिकता को आघात पहुंचाने वाले आरोप सम्मिलित हैं। प्रकरण के संज्ञान में आने पर अभाविप कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके पश्चात प्रकरण पर कार्रवाई कर दोषी शिक्षक को हिरासत में लिया गया था।

अभाविप लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई के इकाई अध्यक्ष आशुतोष श्रीवास्तव जय ने कहा कि, एक प्रतिष्ठित संस्थान में गुरु और शिष्य की पवित्र परंपरा को इस तरह तार-तार करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अक्षम्य है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई यह त्वरित कार्रवाई विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए निरंतर संघर्ष, व्यापक प्रदर्शन एवं प्रशासन पर बनाए गए लोकतांत्रिक दबाव का परिणाम है। आज आरोपित शिक्षक के निलंबन का निर्णय इस तथ्य को स्थापित करता है कि जब छात्रशक्ति न्याय एवं जवाबदेही के पक्ष में संगठित होकर खड़ी होती है, तब संस्थागत तंत्र को भी निर्णायक कार्रवाई करनी पड़ती है। अभाविप पीड़ित छात्रा को न्याय दिलाने के लिए पूरी दृढ़ता के साथ खड़ी है और दोषी की बर्खास्तगी तक हमारा यह संघर्ष विराम नहीं लेगा।

अभाविप लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई के इकाई मंत्री आर्यन कुशवाहा ने कहा कि, यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, जिसके पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं तो दोषी के विरुद्ध विश्वविद्यालय नियमावली एवं विधिक प्रावधानों के अंतर्गत सेवा-समाप्ति सहित कठोरतम विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति अपने पद अथवा प्रभाव का दुरुपयोग करने का दुस्साहस न कर सके। विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान एवं भयमुक्त शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना किसी भी संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है और अभाविप ऐसे प्रत्येक विषय पर पूर्व की भांति दृढ़ता एवं प्रतिबद्धता के साथ खड़ी रहेगी।

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