जनगणना 2027 में विस्थापित कश्मीरी पंडितों की अलग पहचान की मांग
- DSS Admin
- May 14, 2026

जम्मू, 14 मई । पनुन कश्मीर के एक प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मुलाकात कर जनगणना 2027 में विस्थापित कश्मीरी पंडितों को अलग श्रेणी में दर्ज करने की मांग को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के संयोजक डॉ. अग्निशेखर ने किया। ज्ञापन में कहा गया कि कश्मीरी पंडित समुदाय को सामान्य “माइग्रेंट” के रूप में दर्ज करना वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज करना होगा। संगठन ने कहा कि समुदाय का विस्थापन स्वेच्छा से नहीं बल्कि हत्या, भय, असुरक्षा और संस्थागत विफलताओं के कारण हुआ था। इसलिए उन्हें “आंतरिक रूप से विस्थापित नरसंहार पीड़ित और उत्तरजीवी” के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
पनुन कश्मीर ने मांग की कि जनगणना रिकॉर्ड में प्रत्येक विस्थापित कश्मीरी पंडित परिवार और व्यक्ति के कश्मीर घाटी स्थित मूल निवास स्थान का उल्लेख किया जाए, ताकि समुदाय की जनसांख्यिकीय और सांस्कृतिक पहचान संरक्षित रह सके। ज्ञापन में विस्थापन की अवधि, पीढ़ीगत प्रभाव और कारणों को भी आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल करने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि तीन दशक से अधिक समय का विस्थापन सामान्य प्रवास नहीं माना जा सकता और जनगणना में इस ऐतिहासिक वास्तविकता को सही रूप में दर्ज किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि पनुन कश्मीर द्वारा “पनुन कश्मीर जेनोसाइड एंड एट्रोसिटीज प्रिवेंशन बिल-2020” का प्रस्ताव पहले ही संसद सदस्यों और मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जा चुका है। मीडिया से बातचीत में डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि जनगणना 2027 में समुदाय की स्थिति को सही तरीके से दर्ज करना आवश्यक है और किसी भी प्रकार की गलत व्याख्या ऐतिहासिक एवं संवैधानिक वास्तविकता को विकृत करने के समान होगी।

