आयुर्वेद विश्वविद्यालय के डॉ. हरीश सिंघल व डॉ. नीतू को मिला डिज़ाइन पेटेंट

-आयुर्वेदिक बाल स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि

जोधपुर, 09 जून (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कौमारभृत्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो डॉ. हरीश कुमार सिंघल ने आयुर्वेदिक बाल स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारत सरकार के बौद्धिक संपदा कार्यालय पेटेंट कार्यालय से आयुर्वेदिक बाल स्वास्थ्य मूल्यांकन और देखभाल सहायता उपकरण शीर्षक नवाचार के लिए डिज़ाइन पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त किया है।

यह डिज़ाइन भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा डिज़ाइन संख्या 490864-001 के अंतर्गत पंजीकृत कर प्रमाण पत्र जारी किया गया। यह उपलब्धि आयुर्वेद आधारित बाल स्वास्थ्य प्रबंधन एवं तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की शोध एवं नवाचार क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करती है।

उक्त नवाचार एक अभिनव आयुर्वेदिक बाल स्वास्थ्य मूल्यांकन एवं देखभाल सहायता उपकरण है, जिसे विशेष रूप से बच्चों के समग्र स्वास्थ्य परीक्षण, विकासात्मक मूल्यांकन, पोषण स्थिति, व्यवहारिक अवलोकन एवं आयुर्वेदिक स्वास्थ्य संकेतकों के वैज्ञानिक विश्लेषण हेतु विकसित किया गया है। यह उपकरण आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

प्रो डॉ. हरीश कुमार सिंघल ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों में पोषण संबंधी समस्याएं, न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स, स्क्रीन एक्सपोजर से उत्पन्न स्वास्थ्य चुनौतियां तथा जीवनशैली आधारित विकारों में निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसे समय में आयुर्वेद आधारित वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक उपकरणों का विकास अत्यंत आवश्यक है।

यह डिवाइस चिकित्सकों, शोधकर्ताओं एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को बाल स्वास्थ्य के बहुआयामी मूल्यांकन में सहायता प्रदान करेगा तथा प्रारंभिक पहचान एवं समयबद्ध प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएगा।

   

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