पश्चिम बंगाल में वीबी-ग्रामीण-जी योजना एक जुलाई से शुरू, एक जून से मनरेगा पुनः शुरू : दिलीप घोष
- DSS Admin
- Jun 04, 2026
कोलकाता, 04 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल सरकार एक जुलाई से एक नई ग्रामीण रोजगार योजना “विकसित भारत –ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका संवर्धन मिशन (वीबी-ग्रामीण-जी)” शुरू करने जा रही है। ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने गुरुवार को यह घोषणा की। उन्होंने यह भी बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), जिसे आमतौर पर 100 दिन का रोजगार कार्यक्रम कहा जाता है, राज्य में एक जून से पुनः शुरू कर दी गई है। यह योजना मार्च 2022 से ठप थी।
नई वीबी-ग्रामीण-जी योजना के तहत पात्र जॉब कार्ड धारक परिवारों को प्रति वर्ष अधिकतम 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा, साथ ही न्यूनतम 60 दिनों के वेतन रोजगार की गारंटी भी दी जाएगी। यह योजना राज्य के लगभग 2.56 करोड़ जॉब कार्ड धारकों को कवर करने की संभावना है।
दिलीप घोष ने बताया कि इस योजना का वित्तपोषण केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में साझा किया जाएगा। इसका वार्षिक व्यय 12 हजार 850 करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित है, जिससे यह राज्य की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजनाओं में से एक बन जाएगी।
उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
दिलीप घोष ने कहा कि मनरेगा को राज्य में एक जून से पुनः शुरू कर दिया गया है। एक जुलाई से वीबी-ग्रामीण-जी लागू होगी, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी दी जाएगी।
मनरेगा की बहाली उस लंबे विवाद के बाद हुई है, जो केंद्र और तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच फंड उपयोग और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर चला आ रहा था। केंद्र सरकार ने 2022 में वित्तीय सहायता रोक दी थी, जिसके बाद जांच और जवाबदेही को लेकर सख्ती की मांग की गई थी।
दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान योजना के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें सामने आईं।
मनरेगा को राज्य के भूमिहीन मजदूरों, छोटे किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण आय स्रोत माना जाता रहा है, विशेषकर कृषि के ऑफ-सीजन में।
अधिकारियों के अनुसार, वीबी-ग्रामीण-जी के क्रियान्वयन की तैयारी शुरू कर दी गई है, जिसमें दिशा-निर्देश तैयार करना, फील्ड स्टाफ का प्रशिक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र विकसित करना शामिल है।

