सुक्खू सरकार द्वारा वीबी-जीराम-जी योजना का विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण :वीरेंद्र कंवर

शिमला, 27 जून (हि.स.)। पूर्व ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र कंवर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा केंद्र सरकार की वीबी-जीराम-जी योजना का विरोध किए जाने पर प्रदेश सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश के विकास और हितों के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन प्रदेश सरकार राजनीतिक कारणों से जनहित से जुड़ी योजनाओं का विरोध कर रही है।

वीरेंद्र कंवर ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा में सुधार करते हुए वीबी-जीराम-जी योजना लागू की है। उनके अनुसार इस योजना का उद्देश्य पंचायतों का समग्र और योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि पहले कई विकास योजनाओं में केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय भागीदारी का अनुपात 60:40 था, लेकिन इस योजना में इसे बदलकर 90:10 कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि योजना पर होने वाले कुल खर्च का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि राज्य सरकार को केवल 10 प्रतिशत राशि खर्च करनी होगी।

कंवर ने कहा कि इसके बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा इस योजना का विरोध किया जाना समझ से परे है। उनका कहना है कि योजना के तहत ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार और संसाधन उपलब्ध होंगे। पंचायतें ग्रामसभा के माध्यम से अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि पंचायतें पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं, ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण, आधारभूत ढांचे के विकास और अन्य आवश्यक कार्यों को स्थानीय जरूरतों के आधार पर आगे बढ़ा सकेंगी।

भाजपा नेता ने दावा किया कि योजना में कई ऐसे सुधार शामिल किए गए हैं जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेंगे। उनके अनुसार इससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जनता के हितों को प्राथमिकता देने के बजाय केवल विरोध की राजनीति कर रही है।

वीरेंद्र कंवर ने प्रदेश सरकार पर बढ़ते टैक्स, बेरोजगारी और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी जैसे मुद्दों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार इन मामलों में विफल साबित हुई है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर केंद्र सरकार की जनहितकारी योजनाओं को प्रदेश में लागू किया जाए ताकि ग्रामीण विकास को और गति मिल सके।

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