कानूनी जागरूकता कार्यक्रम में न्याय तक पहुंच आसान बनाने पर जोर

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों तक कानूनी जागरूकता एवं न्याय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण कुपवाड़ा ने टंगधार स्थित सरकारी डिग्री कॉलेज में नालसा जागृति योजना-2025 के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का विषय ‘सशक्त युवा, मजबूत भारत’ रहा। कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर कानूनी सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित किया गया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं जेकेएलएसए के संरक्षक-इन-चीफ और कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजीव कुमार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि कानूनी जागरूकता सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम है और न्याय व्यवस्था समाज के हर वर्ग के लिए सुलभ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी और कठिन क्षेत्र न्याय तक पहुंच में बाधा नहीं बननी चाहिए, विशेषकर दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए।
न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने नालसा की जागृति योजना-2025 की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल जमीनी स्तर तक कानूनी जागरूकता और कानूनी सेवाओं के लाभ पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारों के साथ कर्तव्यों की समझ को भी जरूरी बताते हुए कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों का ज्ञान होने के साथ दूसरों के अधिकारों का सम्मान और अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी करना चाहिए। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कानून, संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी युवाओं को बेहतर निर्णय लेने और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करती है। बच्चों और किशोर न्याय से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने संवेदनशील एवं पुनर्वास आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कम उम्र में की गई गलतियों के लिए बच्चों को स्थायी रूप से कलंकित करने के बजाय काउंसलिंग, शिक्षा, अभिभावकीय सहयोग और पुनर्वास पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने युवाओं में बढ़ते नशे और मादक पदार्थों की तस्करी की चुनौती पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोकथाम, शुरुआती पहचान, काउंसलिंग, उपचार और पुनर्वास पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से किसी भी परेशानी की स्थिति में बिना डर या झिझक मदद लेने की अपील की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व देने की आवश्यकता बताई। माता-पिता और शिक्षकों से बच्चों एवं युवाओं के साथ संवाद बनाए रखने और उनकी भावनात्मक स्थिति, मित्रता तथा ऑनलाइन गतिविधियों को समझने का आग्रह किया। साइबर धोखाधड़ी, ऑनलाइन उत्पीड़न, पहचान के दुरुपयोग और गलत सूचना जैसी डिजिटल चुनौतियों के प्रति भी उन्होंने जागरूक रहने की सलाह दी।
उन्होंने छात्राओं और युवतियों से शिक्षा एवं कौशल हासिल कर अवसरों का लाभ उठाने तथा निर्णय प्रक्रिया और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और युवतियों का सशक्तीकरण समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है। कार्यक्रम में कानूनी सेवा संस्थानों को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, तालुक कानूनी सेवा समितियां, पैनल अधिवक्ता और पैरा-लीगल वालंटियर जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचें। कानूनी जागरूकता को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखकर स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और समुदायों में लगातार जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम में डीएलएसए कुपवाड़ा के सचिव सहित अन्य वक्ताओं ने नालसा जागृति योजना के उद्देश्यों और इसकी जमीनी कार्यप्रणाली की जानकारी दी। आईएमएचएएनएस-के के डॉ. आदिल ने मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण पर विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को जागरूक किया। इस दौरान छात्रों ने नशा तस्करी के दुष्प्रभावों पर आधारित नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के तहत स्थानीय लोगों के लिए चिकित्सा शिविर भी लगाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को निशुल्क चिकित्सकीय परामर्श, उपचार और दवाएं उपलब्ध कराई गईं। कार्यक्रम के अंत में सरकारी डिग्री कॉलेज टंगधार की प्रोफेसर सदफ रऊफ ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एमके शर्मा, जेकेएलएसए की सदस्य सचिव शाजिया तबस्सुम, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुपवाड़ा मंजीत सिंह मनहास, उपायुक्त कुपवाड़ा श्रीकांत सुसे, एसएसपी कुपवाड़ा सैयद ताहिर गिलानी सहित प्रशासन, पुलिस, शिक्षा विभाग के अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, बार एसोसिएशन टंगधार के सदस्य, शिक्षक, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी मौजूद रहे।

   

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