फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन रैकेट मामला: मेडिकल काउंसिल का वेरीफाइंग ऑफिसर गिरफ्तार

जयपुर, 05 जून (हि.स.)। फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई ) प्रमाण-पत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में पंजीकरण कराने के बहुचर्चित रैकेट में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने कार्रवाई करते हुए राजस्थान मेडिकल काउंसिल के वेरीफाइंग ऑफिसर (कनिष्ठ सहायक) फरहान हसन उर्फ फरहान नकवी निवासी मालपुरा जिला टोंक को गिरफ्तार किया है। आरोपित पर रिश्वत लेकर बिना दस्तावेज का सत्यापन किए फर्जी प्रमाण-पत्रों को सही बताकर रिपोर्ट देने का आरोप है। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पुलिस (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि इस मामले की जांच में सामने आया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड भानाराम माली है। वह विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई कर लौटे उन छात्रों से संपर्क करता था जो भारत में चिकित्सा अभ्यास के लिए अनिवार्य एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर पाए थे। भानाराम ऐसे छात्रों के लिए कूटरचित प्रमाण-पत्र तैयार करवाता था और इसके बदले प्रति छात्20 से 30 लाख रुपये तक वसूलता था। इसके अलावा इस रकम में से प्रति मामले 2 से 5 लाख रुपये राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन वेरीफाइंग ऑफिसर फरहान हसन को दिए जाते थे।

आरोपित फरहान हसन उर्फ फरहान नकवी वर्ष 2023-24 के दौरान आरएमसी के पंजीकरण अनुभाग में कनिष्ठ सहायक एवं वेरीफाइंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। आरोपित फरहान हसन उर्फ फरहान नकवी का मुख्य दायित्व विदेश से मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर लौटे अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का संबंधित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थानों एवं अन्य एजेंसियों से सत्यापन कर रजिस्ट्रार को रिपोर्ट भेजना था। लेकिन आरोपित ने वित्तीय लाभ के लिए काउंसिल के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर बिना किसी जांच-पड़ताल के फर्जी प्रमाण-पत्रों को सही बताते हुए सकारात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। इसके आधार पर अपात्र अभ्यर्थियों को राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करने और अस्थायी पंजीकरण प्राप्त करने का अवसर मिल गया। एसओजी ने अपराध प्रमाणित होने पर आरोपित फरहान हसन को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जयपुर महानगर द्वितीय के समक्ष पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मामले में उससे गहन पूछताछ की जा रही है। फिलहाल एसओजी आरोपित फरहान हसन से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि उसके कार्यकाल में कितने और फर्जी पंजीकरण किए गए तथा इस रैकेट में काउंसिल के अन्य कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। जांच एजेंसी को इस मामले में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की उम्मीद है।

गौरतलब है कि एसओजी थाना जयपुर में 4 फरवरी 2026 को प्रकरण दर्ज किया गया था। अब तक की कार्रवाई में फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर इंटर्नशिप और पंजीकरण कराने वाले 17 विदेशी स्नातक डॉक्टरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, मुख्य आरोपित भानाराम माली तथा एक दलाल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

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