वैश्विक शोध मंचों से जुड़ने में मदद करेगा जीआरओयूपी अवेयरनेस स्केल : प्रो. विनय कुमार पाठक

कानपुर, 27 जून (हि.स.)। भारतीय शोधार्थियों को वैश्विक शोध मंचों से जोड़ने और उनके शोध कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से ग्लोबल रिसर्च ओरिएंटेड यूटिलिटी प्लेटफॉर्म्स (जीआरओयूपी) अवेयरनेस स्केल विकसित किया गया है। यह पैमाना शोधार्थियों की वैश्विक ऑनलाइन शोध मंचों के प्रति जागरूकता, उपयोग और उनकी उपयोगिता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगा। यह बातें शनिवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।

सीएसजेएमयू के शिक्षा विभाग की ओर से शोध के क्षेत्र में यह नई पहल की गई है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विमल सिंह ने जीआरओयूपी अवेयरनेस स्केल विकसित किया है। इसके माध्यम से यह आकलन किया जाएगा कि भारतीय स्नातकोत्तर एवं पीएचडी शोधार्थी रिसर्चगेट, गूगल स्कॉलर, स्कोपस, वेब ऑफ साइंस और अन्य वैश्विक शोध मंचों के बारे में कितनी जानकारी रखते हैं और उनका कितना उपयोग करते हैं।

डॉ. विमल सिंह ने बताया कि इस स्केल को ओरिएंटेशन, यूटिलिटी और रिलेवेंस (ओ यू आर) मॉडल पर तैयार किया गया है। इसमें शोधार्थियों की इन मंचों के प्रति जानकारी, उनके व्यावहारिक उपयोग और शोध कार्य में उनकी प्रासंगिकता का मूल्यांकन किया जाएगा।

स्केल तैयार करने के लिए पहले 56 प्रश्नों का प्रारूप बनाया गया। विशेषज्ञों की समीक्षा और सांख्यिकीय विश्लेषण के बाद इसे 31 प्रश्नों तक सीमित किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के 800 स्नातकोत्तर एवं पीएचडी शोधार्थियों पर इसका परीक्षण किया गया, जिसमें यह पैमाना विश्वसनीय और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप पाया गया।

स्केल में कुल 31 प्रश्न शामिल हैं, जिनके आधार पर शोधार्थियों को पांच अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। इससे विश्वविद्यालय और शोध संस्थानों को यह समझने में मदद मिलेगी कि शोधार्थियों को वैश्विक शोध मंचों के प्रभावी उपयोग के लिए किस प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

विश्वविद्यालय के अनुसार यह पहल भारतीय शोधार्थियों की शोध गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान और वैश्विक शोध समुदाय के साथ उनकी सहभागिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। यह स्केल मानस साइको होम, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है और शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में कार्य करेगा।

   

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