गुरुग्राम: संतों की सुरक्षा के लिए जैन समाज ने की संत सुरक्षा नीति की मांग

-मध्य प्रदेश में दो जैन संतों की सडक़ हादसे में मौत पर गुरुग्राम जैन समाज ने सौंपा ज्ञापन

-डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति, गृह मंत्री और सीएम को भेजा ज्ञापन

गुरुग्राम, 29 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा में विहाररत दो आर्यिका माताओं (जैन संतों) की सडक़ दुर्घटना में हुई मौत से जैन समाज क्षुब्ध है। गुरुग्राम से जैन समाज ने शुक्रवार को जिला उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध और राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि यह घटना केवल एक सडक़ दुर्घटना नहीं मानी जा सकती। उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिपों के आधार पर जैन समाज में गहरी आशंका और चिंता का माहौल है। इसलिए इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच अत्यंत आवश्यक है। जैन समाज का कहना है कि जैन साधु-संत पूर्णत: निहत्थे, अहिंसक और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं। वे किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधा का उपयोग नहीं करते। समाज में शांति, संयम और अहिंसा का संदेश देते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं और हमले पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं।

संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग

श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से जैकबपुरा सदर बाजार से प्रधान नरेश कुमार जैन, उपप्रधान शैलेंद्र जैन, महामंत्री अशोक कुमार जैन, सह मंत्री जिनेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष प्रदीप जैन, जैन समाज के प्रवक्ता अभय जैन एडवोकेट, निर्दोष जैन, मुनेश जैन, राजेश जैन, सेक्टर-14 जैन मंदिर के प्रधान एडवोकेट रविंद्र जैन एडवोकेट आदि ने कहा कि विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल लागू किया जाए। संतों के विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय बढ़ाया जाए, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और हाईवे व भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सावधानी सुनिश्चित की जाए। समाज ने प्रशासन और समाज के बीच समन्वय के लिए स्थानीय स्तर पर संत सिक्योरिटी कॉर्डिनेशन सेल और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। साथ ही कहा कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है।

   

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