
चंडीगढ़, 2 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा में साइबर सिटी के नाम से मशहूर गुरुग्राम में 54 ऐसी इमारतें हैं, जिन्हें खतरनाक घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद नगर निगम कोई सबक नहीं ले रहा है और यहां किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग ने नगर निगम की लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है।
आयोग ने 20 मई को होने वाली सुनवाई में निगम आयुक्त और चीफ इंजीनियर को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के आदेश जारी किए हैं। आयोग इस बात पर काफी नाराज है कि नगर निगम ने इन 54 इमारतों को लेकर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की। 10 फरवरी, 2022 को गुरुग्राम की चिंटल पैराडाइज सोसायटी की बहुमंजिला इमारत का एक हिस्सा गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई थी। इस हादसे में एक व्यक्ति घायल भी हुआ। इस घटना के बाद मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया। नगर निगम की ओर से आयोग को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया कि गुरुग्राम में 183 खतरनाक इमारतों को चिह्नित किया गया। इनमें से 152 इमारतों का निरीक्षण भी किया गया। उस समय 80 इमारतों को खतरनाक माना गया। अब निगम की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में इस संख्या को घटाकर 54 कर दिया है। इतना ही नहीं, 15 इमारतों का निगम ने अभी तक निरीक्षण भी नहीं किया है। आयोग ने अपने नोटिस में स्पष्ट तौर पर कहा है कि इससे स्पष्ट होता है कि नगर निगम इस मुद्दे पर कतई गंभीर नहीं है।
मानवाधिकार आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बुधवार को बताया कि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) ललित बतरा, सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया की पीठ ने मुख्य अभियंता मनोज यादव को निर्देश दिए हैं कि वे अगली सुनवाई में 54 खतरनाक इमारतों और शेष 15 इमारतों की स्थिति पर ठोस कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करें। इस मामले की अगली सुनवाई 20 मई को होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा