वेदों के स्वाध्याय और यज्ञ से मिलता है निरोग जीवन व दीर्घायु-स्वामी राम स्वरूप जी

Healthy life and long life are obtained through self-study of Vedas and Yagya - Swami Ram Swarup Ji


कठुआ, 03 जून । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 53वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने अथर्ववेद काण्ड 3 सूक्त 10 एवं 11 के आधार पर श्रद्धालुओं को ज्ञान प्रदान किया।

स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य जन्म पाकर हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह विद्वानों से वेदों को सुने और उनका नियमित स्वाध्याय करे तभी वह सच्चे अर्थों में तपस्वी कहलाने योग्य बनता है।

उन्होंने बताया कि वेदों के अनुसार तप, स्वाध्याय और साधना से काम, क्रोध, लोभ, अहंकार जैसे विकारों का नाश होता है और जीवन पवित्र बनता है। स्वामी जी ने आगे कहा कि नित्य अग्निहोत्र, यज्ञ, ईश्वर में आस्था और नाम-सिमरन से व्यक्ति को निरोगता और दीर्घायु प्राप्त होती है।

उन्होंने अथर्ववेद का उल्लेख करते हुए कहा कि परमेश्वर स्वयं वचन देता है कि साधक को गंभीर रोग और मृत्यु के मुख से भी वापस लाकर सौ वर्ष तक स्वस्थ जीवन प्रदान कर सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान समय में लोग वेदों से दूर हो गए हैं जिसके कारण मानसिक तनाव, रोग और अल्पायु जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि भारत को पुनः महान बनाने और जीवन को सुखमय बनाने के लिए वेद मार्ग को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

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