वागड़ की तस्वीर बदलेगी अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना, 338 गांवों की 42 हजार हेक्टेयर भूमि तक पहुंचेगा सिंचाई जल
- DSS Admin
- Jun 07, 2026


जयपुर, 07 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान को जल आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में वागड़ अंचल की बहुप्रतीक्षित अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ युद्धस्तर पर क्रियान्वित किया जा रहा है।
करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन यह महत्वाकांक्षी परियोजना बांसवाड़ा जिले के जनजाति बहुल क्षेत्रों की कृषि व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होने जा रही है।
परियोजना के पूर्ण होने पर बांसवाड़ा जिले की बांसवाड़ा, बागीदौरा और कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्रों की छह तहसीलों बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, आनंदपुरी और गांगड़तलाई के 338 गांवों की लगभग 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई प्रणाली के माध्यम से जल उपलब्ध कराया जाएगा।
इससे क्षेत्र की करीब साढ़े तीन लाख आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होगी।
अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण होगी। परियोजना के तहत 102 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर का निर्माण किया जा रहा है। इसमें 22.50 किलोमीटर लंबाई में सुरंगें, कट एंड कवर संरचनाएं, एक्वाडक्ट तथा नदी पार करने के लिए साइफन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा लगभग 230 महत्वपूर्ण संरचनाएं जैसे सुपरपासेज, ड्रेनेज साइफन, सड़क पुल, एस्केप कम क्रॉस रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर भी परियोजना का हिस्सा हैं।
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका प्रेशर आधारित सिंचाई तंत्र है। इसके तहत कमांड क्षेत्र को अत्याधुनिक तकनीक से विकसित किया जा रहा है, जिससे खेत स्तर तक नियंत्रित एवं वैज्ञानिक सिंचाई संभव हो सकेगी।
योजना के अनुसार प्रत्येक 200 हेक्टेयर क्षेत्र पर एक डिग्गी विकसित की जाएगी। कुल लगभग 200 डिग्गियों का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्य नहर से इन डिग्गियों तक जल एमएस और डीआई पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। इसके बाद लगभग 5 हजार किलोमीटर लंबा भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे किसानों के खेतों तक दबावयुक्त सिंचाई प्रणाली के जरिए पानी पहुंचेगा।
इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक 1.25 से 1.50 हेक्टेयर क्षेत्र पर हाइड्रेंट स्थापित किए जाएंगे, जहां से किसान सीधे सिंचाई के लिए पानी प्राप्त कर सकेंगे।
इससे जल की बर्बादी कम होगी, समान जल वितरण सुनिश्चित होगा और कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो सकेगी।
परियोजना में आधुनिक स्काडा (पर्यवेक्षक नियंत्रण एवं डेटा अधिग्रहण) प्रणाली भी विकसित की जा रही है। इसके माध्यम से संपूर्ण सिंचाई तंत्र का संचालन और निगरानी स्वचालित रूप से होगी। यह प्रणाली पंपिंग स्टेशनों, पाइपलाइन नेटवर्क, रिलीफ वाल्व, हाइड्रेंट तथा विभिन्न शाखाओं में जल प्रवाह की रियल टाइम निगरानी करेगी।
साथ ही दबाव और जल प्रवाह को स्वतः नियंत्रित कर जल वितरण को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाएगी। इससे जल प्रबंधन में दक्षता बढ़ेगी तथा तकनीकी समस्याओं की तुरंत पहचान संभव होगी।
जल संसाधन विभाग के अनुसार वर्तमान में मुख्य नहर के लगभग 42 किलोमीटर हिस्से में निर्माण कार्य जारी है। परियोजना के तहत इनटेक स्ट्रक्चर और स्लूइस बैरल का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। वहीं सुरंग निर्माण, एक्वाडक्ट, साइफन, कट एंड कवर संरचनाओं तथा नहर से डिग्गियों तक भूमिगत पाइपलाइन बिछाने का कार्य विभिन्न स्थानों पर तेजी से चल रहा है।
राज्य सरकार परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग कर रही है तथा निर्माण एजेंसियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
परियोजना के लिए 78 गांवों की लगभग 270 हेक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। अब तक 67 गांवों की 211 हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 47 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित किए जा चुके हैं, जबकि करीब 15 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है।
शेष भूमि अधिग्रहण और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रियाओं को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि परियोजना निर्धारित समय सीमा में पूरी हो सके। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि परियोजना पूर्ण होने के बाद बांसवाड़ा जिले की कृषि अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव आएगा। किसानों को पूरे वर्ष सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि मक्का, गेहूं, दलहन, तिलहन तथा बागवानी फसलों का रकबा बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही भूजल स्तर में सुधार, जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को भी मजबूती मिलेगी।
वागड़ क्षेत्र लंबे समय से सिंचाई सुविधाओं की कमी से जूझता रहा है। ऐसे में अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना केवल एक सिंचाई योजना नहीं, बल्कि जनजाति बहुल क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार बनने जा रही है। कृषि आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने, ग्रामीण पलायन में कमी आने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद वागड़ क्षेत्र की खेती वर्षा पर निर्भरता से बाहर निकलकर आधुनिक और टिकाऊ कृषि मॉडल की ओर बढ़ सकेगी। यही कारण है कि इस परियोजना को दक्षिणी राजस्थान के विकास की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक माना जा रहा है।
---------------

