कला जीवन में बड़े उद्देश्यों के लिए हमें प्रेरित करती है: मंजू लोढ़ा
- DSS Admin
- Jul 03, 2026
-न्यूमरोलॉजी पर आधारित कला प्रदर्शनी 'ग्रह पूर्ति यन्त्रम' का शुभारम्भ
मुंबई, 3 जुलाई, (हि. स.)। न्यूमरोलॉजी पर आधारित चित्रकला की नई विधा की शुरुआत करने वाली मशहूर चित्रकार प्रणिता घोड़े की कला प्रदर्शनी ग्रह पूर्ति यन्त्रम 2 जुलाई, 2026 से मुंबई में शुरू हुई, जो आगामी 5 जुलाई, 2026 तक सभी दर्शकों के निःशुल्क अवलोकनार्थ खुली रहेगी। प्रदर्शनी का उद्घाटन समाजसेविका, वरिष्ठ साहित्यकार और लोढ़ा फाउंडेशन की अध्यक्षा मंजू लोढ़ा ने किया। इस चार दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए श्रीमती लोढ़ा ने कहा कि कला जीवन में बड़े उद्देश्यों के लिए हमें प्रेरित करती है।
मुंबई महानगर की प्रमुख सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था और प्रदर्शनी के आयोजक आकृति आर्ट फाउंडेशन के डायरेक्टर मनमोहन जायसवाल ने बताया कि यह कला प्रदर्शनी मुंबई के भूलाभाई देसाई रोड स्थित सिमरोज़ा आर्ट गैलरी में लगाई गई है। उन्होंने बताया कि चित्रकार प्रणिता घोड़े की पेंटिंग्स विशेषकर प्रत्येक इंसान के लिए अलग होती हैं। वे हर व्यक्ति की जन्म तिथि के गणितीय समीकरण के आधार पर पेंटिंग्स का सृजन करती हैं, जो उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में अन्य विशिष्ट अतिथियों के रूप में जस्टिस के. के. तातेड और वरिष्ठ उद्योगपति गणपत कोठारी के अलावा समाजसेवी आदित्य सक्सेरिया, श्रीमती लीना चोपड़ा, डॉली ठाकोर, शहनाज खान, मालती जैन, आदित्य मोहता, पीयूष शर्मा, रमेश साबू, सुमन पारेख, प्रियांक पारेख , प्रीति शाह, भूषण जाधव, मेजर अरुण सिन्हा, विपुल दवे, लेखक विट्ठल घोड़े, चित्रकार एवं दिग्दर्शक शीतल दोड़के, गजानन लाहूडकर और विजय गायगवड़ी सहित विभिन्न प्रबुद्ध कला प्रेमी मौजूद रहे। समारोह का संचालन ग़ज़ल शेख ने किया। उल्लेखनीय है कि सुश्री प्रणिता पिछले 15 वर्षों से न्यूमरोलॉजी के अंतर्गत भाग्यांक और मूलांक पर आधारित पेंटिंग करती हैं।
इस बारे में सुश्री प्रणिता ने बताया कि पिछले 15 वर्षों के अध्ययन, अनुभव और निरंतर शोध के आधार पर उन्होंने जन्मतिथि के अंकों पर आधारित व्यक्तिगत ‘ग्रहपूर्ति यंत्र’ की संकल्पना विकसित की है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति की जन्मतिथि के अंकों के संतुलन, उनके गणितीय सम्बंधों का अध्ययन तथा उन्हें कलात्मक रूप में कैनवास पर प्रस्तुत करना शामिल है। उनका मानना है कि यह कला, न्यूमरोलॉजी और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक अनूठा संगम है। उन्होंने कहा कि उनकी कला न केवल एक विजुअल ब्यूटी है, बल्कि यह जीवन में अनुकूलता, सुख- शांति और समृद्धि भी लाती है।

