भारत ने नेपाल को 50 हजार मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक खरीदने की मंजूरी दी

काठमांडू, 10 जून (हि.स.)। भारत सरकार ने नेपाल को 30 हजार मीट्रिक टन यूरिया और 20 हजार मीट्रिक टन डीएपी (डाइ-अमोनियम फॉस्फेट) रासायनिक उर्वरक खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के साथ ही दोनों देशों की सरकारी एजेंसियों ने सरकार-से-सरकार (जीटूजी) समझौते के तहत उर्वरक आपूर्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।

धान रोपाई के मुख्य मौसम में रासायनिक उर्वरकों की कमी की आशंका को देखते हुए नेपाल सरकार ने भारत से उर्वरक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद भारत ने अपनी 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत नेपाल को आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। भारत की नेशनल केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर लिमिटेड (आरसीएफ) ने 30 हजार मीट्रिक टन यूरिया और 20 हजार मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। उर्वरक की खरीद और ढुलाई प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आरसीएफ और कृषि सामग्री कम्पनी लिमिटेड (केएससीएल) तकनीकी तैयारियों में जुट गए हैं।

कृषि सामग्री कम्पनी लिमिटेड के सूचना अधिकारी पुण्यप्रसाद उपाध्याय ने बताया कि भारत से उर्वरक उपलब्ध कराने की औपचारिक स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि नेपाल सरकार खरीद के लिए आवश्यक धनराशि समय पर जारी कर देती है, तो निर्धारित समय के भीतर उर्वरक नेपाल पहुंच जाएगा। उपाध्याय ने कहा कि यूरिया और डीएपी उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए भारत की आरसीएफ कंपनी से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। सरकार यदि समय पर बजट जारी कर दे, तो साउन के मध्य तक उर्वरक नेपाल पहुंच जाएगा।

हाल के दिनों में वैश्विक राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण कई देशों में रासायनिक उर्वरकों की कमी देखी जा रही है। इसके बावजूद भारत सरकार ने नेपाल में धान रोपाई के मौसम के दौरान उर्वरक संकट को रोकने के लिए इस मात्रा में उर्वरक खरीद की अनुमति प्रदान की है। जीटूजी समझौते के तहत होने वाली इस आपूर्ति के लिए आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होने पर लगभग जुलाई अंत तक उर्वरक नेपाल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

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